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Sunday, September 29, 2024

राजनीती बदल रही है साथ ही मेरे भारतवासीभी बदल रहे है



राजनीती बदल रही है साथ ही मेरे भारतवासीभी बदल रहे है 






मोदीजी डर गया है अब राहुलजी ने राजनीति सीखली है अच्छी बात है कोई भी अपनी पार्टी को अच्छी ओर साफ सुधरा बता सकता है इसलिए तो बेल पर जमानत से बाहर है  ऐसे तो विपक्ष हो या सताधारी  पार्टी मैं भी बेल् पर जमानत से बाहर है ऐसे कई नेता हैं अपने पर लगे आरोपीको वो हो बेबुनियाद हैऔर ईमानदार है ये चिल्ला चिल्ला कर बोल रहे हैं 

 चुनाव आते हैं हर मंदिर हो मजीद हो या  चर्च मथहा टेक आते हैं b ये तो छोड़ो किसी एक  गरीब के घर जाकर खाना खा कर आते है और  ये भी बता देते हैं की हमारा फलाना फलाना नेता  गरीबों का मसीहा  है कितनी गंदी राजनीति करते हैं जाति धर्म पर लडवा कर देश को गुमराह करते हैं लड़वाते हैं या फिर इसी विषय पर हगामा खड़ा कर सड़को पर या आदोलन उत्तर आते है किसी बेटी का बालतकार हो जाए इस पीड़ित का दर्द बाजू पर बस फिर क्या मिडिया से लेकर  आम आदमी ओर राजनेता अपना पक्ष लेकर खड़े हो जाते है जन प्रतिनिधि मामला सुलझाने के बजाय  धर्म के नाम पर लड़वा देते हैं  कुछ लोग ऐसेभी है जो उसी लड़की का वीडियो अश्विलता वाला वायरल कर देते है जो ये नही सोचते ऐसा करने से आगे क्या होगा  बस बिना सोचे समझे किसका  अस्तित्व को मिटा देते हैं पर हमें उस लड़की को न्याय दिलाने कुछ दिनों तक जागे रहते है फिर हम हमारे रास्ते सरकार के लोग उनके रास्ते बस येही  होताआ रहा अब तक फिर कया  कोई ऐसी  घटना  का इंतजार वोही मूल्यकान होता हैं फिर से वोही  सिलसिला दोहराया जाता है पर अभी तक नाही पीड़ित बेटी हो बहु हो या पत्नी इनकी न्याय की  बुहार लागने वाले परिजनोंको 
न्यायपालिका से न्याय नहीं मिला उनके घर वालो को अभी तक वो इंसाफ का इंतजार कर रहे है  पर इनको क्या मिला बदले मैं उन्हें क्या हासिल हुआ  अपनी बेटी की बदनामी साथ साथ माँ बाप को समाज में लज्जा से सर  जुकाय बदनामी जेलना और लोगो से क्या मिलता बदले मैं  थोड़ी सी साहनुभूति और कैंडल मारर्च लोगो को दिखाने के लिए किसी भी राज्य की  घटना हो लड़कीको  न्याय बाद मैं मिलता है की नहीं वो भीं पता नही  पर जनप्रतिनिधि  सरकार को कोसना  चालू  कर देते है या जाने क्या क्या नहीं बोलते पर नया कानून लाने के लिए कोई सरकार या विपक्ष आगे नहीं आती कितनी भी घटिया राजनीति हो जाए  पर  न्याय के लिए कोई कानून नहीं बनता और ये विषय को और ठंडे बक्से में डाल दिया जाता है  हम अपना दिल और दिमाग ठंडा कर बैठ जाते है आजादी के 77 साल में हम भी हम जात पात धर्म पानी सब्जी दाल चावल पेट्रोल डीजल के दाम पर अटकी है और आरक्षण मे उलझे है 

देश के युवाओ के लिए  उज्वल भविष्य के लिए देश तरक्की के लिए कोई बात नहीं करता है जो सरकार करती है वह हमारी सरकार के साथ कदम से कदम भी चलते नही उल्टा उसे गिराने के लिए नए पैंतरे या मुद्दे लाती है चाहे उसके मायने हो या नहीं यहां हमारे देश के नागरिक को देश तरक्की करे उसके बारे कम सोचते ज्यादातर अपना ध्यान  प्रति पेट्रोल डीजल  सब्जी रोटी दाल चावल पर ही अटकी  ही हमारे नागरिक को जो कुछ लोग है जिन्हे दाम 1990 ये 1999 के दाम चाहिए और सुविधा हो  पगार की  आमदनी आज के हिसाब से वाह मेरे देश के नागरिक आप भी देश के नेता जी ही निकले 

 26 जनवरी या 15 अगस्त को देश प्रति देश प्रेम की बात करते हैं आशु बहाते है राष्ट्रीयध्वज को सलामी देकर दूसरे दिन राष्ट्र प्रति देशभक्ति भूल जाते हैं ऐसे दोगले विचारो वाली सोच राज नेता से लेकर सामान्य नागरिक तक सोच विकसित हो रही है 

जाने मेरा देश कहा या कौन सी दिशा में जा रहा है इसी घटनाएं  देश के प्रगति के रास्ते पर  अड़चने पैदा कर रही है  जो देश को आगे लेजाने दिन रात एक कर रहा है वही दूसरी ओर भीतर बैठे कुछ लोग देश को बदनाम और देश में अारर्जकता फैला रहे हैं  देश को जाती धर्म के नाम पर बाट रहे है और हमारे बीच कुछ ना समझ लोग है जो समझना नहीं चाहते इनकी सोच के कारण आज जो ना समझ  भाईयो बहेने हमारे युवा बुजुर्ग इनके बहकावे में आकर अपना और देश नुकसान पहुंचा रहे है 

हमे सही दिशा मैं आगे बड़ना होगा जात पात धर्म मैं ना फसते हुवे ही राष्ट्रप्रेम का धर्म निभाना चाइए देश की तरक्की लिए सब्जी रोटी दाल चावल पेट्रोल डीजल टमाटर पियाज  आलू मैं नही उलझना  चाहिए 
हमे आने वाली अपनी पीढ़ी को बेहतर बनाने के लिए आज का वर्तमान को और भविष्य को सुरक्षित करना होगा हमारे भारत की छबि तब चमकेगी जब राष्ट्रप्रेम की भावना अपने दिल मैं जागाकर देशके हित मैं कदम से कदम मिलाकर हम सब एक ही राह पर साथ साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे 

जरा सोचिएगा जरूर क्या हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे है 

आपकी अपनी पसिंदा प्रस्तुत 

DBM प्रस्तुति

Friday, January 26, 2024

मन और दिल का घमासान में फसा बिचारा बदलाव


मन और दिल का घमासान में फसा बिचारा बदलाव 


मन के उतार चढ़ाव  कभी दिल से मेल नहीं खाते दिल और मन एक साथ जरूर है 
पर बदलाव लाने मैं मन हमेशा आगे जल्दी होता नही है क्योंकि वो स्टोरेज बॉक्स है अगला पिछला सब एक साथ  परोस देता है फिर क्या लगे रहो उलजनी मैं पिछली गलती को ज्यादा याद कर अच्छा भुला दिया जाता है और दिल सारे तथ्य सामने रख भी देता है तो बिचारा दिल पहले से हारा समझ ही लेता है पर दिल से सोचा हुवा  और  मन ने सोचा हुवा मैं ज्यादा अंतर नहीं होता मन अपने आपको ब्रह्मांड समझता है और दिल विशाल दरिया  इस बीच मैं जो अच्छा कुछ हे तो अच्छा हो भी जाए तब नेकी कर दरिया में डाल वाला शब्द  बोलते हुवे हम नजर आयेगे  तब दिल क्रेडिट लेगा  मन कहेगा मेरे  उदार वाद रवैये से ये सफल हुवा है  दिल अपनी ओर बात कहेगा और मन अपनी  बात ओर फिर क्या था बस एक दूसरे की तना तनी में  लगे रहते हे इस बीच में  कोई आ जाए बस फिर क्या गुस्सा सारा सातवे आसमान पर सवारी  कर बस बरस पड़ोगे ये सब जानते हुवे भी  उसकी कोई गलती नही फिर भी हम कभी कभी हम अपनी गलती  स्वीकारते भी नही ये हर व्यक्ति के साथ नही होता नाही कोई माहोल देख कर भी नहीं  होता है जब ये   काबू छूट जाता है दिल और मन एक होते है फिर ये सब होता है ये चाहे में हु या आपसब ये वाकया हर किसी के साथ हो चुकी है 

इस बीच एक और बात रखूंगा 

अपने ही शरीर मैं मन भी और दिल भी फिर भी मतभेद  और अपने और पराए की क्या बात करे  पहले तो हम ही सही नही है और ओरो पर क्यों सवाल खड़े करते है  इस बीच में बदलाव शब्द आता हैं इस बार पहले जैसा नहीं होगा में ध्यान रखूंगा या रखुगी पर इस पर अमल करने वालो की संख्या काफी कम है  पर इस बात पर ज्ञान देने वालो हजारों मिलगे और उनकी बातो फॉरवर्ड करते करते कभी भी अपने अंदर बदलाव की उम्मीद भी जन्म नहीं लेती बिचारा बदलाव शब्द  डीसनरी से गायब ना हो जाए  इश्का ख्याल हमे रखना होगा बदलाव एकदम से नहीं आता धीरे धीरे आता है आज एक बात उठा कर उसे अमल फिर दूसरा फिर तिसरा ऐसे आगे बढ़े तो ही बदलाव आयेगा नाही फिर जो डीसनरी से बदलाव गायब होने वाला था कभी नही होगा.

बस हर व्यक्ति को बदलाव के प्रयास करने चाइए  ये ही उद्देश्य लेकर चले 

                                                                           DBM प्रस्तुति




 

Friday, November 3, 2023

अच्छा हो पर बेहतर हो मेरा भारत मेरा एक वोट देश के विकास के लिए

   अच्छा हो पर बेहतर हो  मेरा भारत  

                                              मेरा एक वोट देश के विकास के लिए



कभी ये भी सोचिए विश्व के दौरे पर जाते है तो उस देश के बारे में तारीफ करते हम थकते नहीं और उस समय कहत है हमारे भारत मैं ये सब सुविधा कब होगी अगर ये सुविधा जब आपने ९ साल मैं कुछ बदलाव देखा है कुछ अच्छा होते हुवे देखा है आने वाली पीढ़ी को कुछ अच्छा देने की जिमेदारी है तो वोट उनको दो को राष्ट्रवाद को दर्जा देता हैं भारत की उन्नति मैं अपना योगदान देने की समता रखे भारत की छबि को विश्व में विश्वगुरु की ओर आगे बढ़ते कदम कहेलाने की शुरवात कर दे आज इकोमिक लेवल पर आज भारत 5वे पायदान में है और हम विश्व की बड़ी अर्थ व्यवशता में 3 में सामिल होने का सपना देख रहे आज हम ने और आपने जो जो महेशुष किया है आज हमे वो ही करना चाइये जो बेहतर आज देकर और कल की बहेतर दिन देने का सकल्प पूरा करने का जज्बा हो हमे उनका ही साथ देना पड़े तो देना। चाइए

वोट भले ही पांच साल का एक बार का अधिकार है पर उसका उपयोग करे

वोट देनके समय गुमने ना जाए मेरे एक वोट से क्या फर्क पड़ता है फिर वोट ना देकर सरकार को कोसने का कोई अधिकार नहीं वोट दो फिर हक से अपनी बात सरकार तक पहुंचाए

अपने मतदार अधिकार का जरूर उपयोग करे ताकि आने वाली अपनी पढ़ी को अच्छा कल अच्छा भविष्य दे पाए ऐसा एक संकल्प अपने आप से करना चाइए


DBM प्रस्तुति

Tuesday, October 10, 2023

આતુરતા

 આતુરતા


શીખવા ની સમજ આપણી લાયકાત પ્રમાણે નહિ પણ આપણી આતુરતા પર નિર્ભર છે સાહેબ બાકી બધાજ શીખે છે પણ સફળતા એનેજ મળે છે જે સાબિત કરવા માટે તત્પર છે ને જે ઝમઝુમી રહ્યા છે  આ સાબિત કરનાર ની  સંખ્યા વિશ્વમાં  કેટલી છે એ સાબિત કરવું જ હોય તો રોજ 10 ને મળી ને જાણો એમના જીવન માં શું ગોલ છે તો જો તમને 3 થી 4 મળશે ને તો મહિના ના 

120 X12  વર્ષ  નાં =1440 ભારત ની આબાદી સાથે % સાથે divide ભી કરશો ને  તો ભી 10% થી વધારે નહિ હોય  આવું એક સર્વે આપણી સમકક્ષ ઈલેકશન ના સમય પર આવા સર્વે થતાં હોય છે જે એવી રીતે આપણી સમક્ષ રજૂ કરતાં હોય છે 4થી5 લાખ નાગરિક કોને  મળીને  ભારત ના ભાવિ સરકાર નું ભવિષ્ય પણ નક્કી થઈ જતું હોય છે ને આ તો કાબલિયત ની વાત થાય છે   તો વિચારો કે 140 કરોડ ની આબાદી માં પણ અબજો ની સંખ્યા માં ભારતીય ઉદ્યોગપતિ ની સંખ્યા પણ પોઇન્ટ માંજ calculate થાય છે વિચારવા જેવું છે સાહેબ ભણતર માટે શીખવનાર ની સ્કૂલ તો ગણી છે પણ લાયકાત ની જિજ્ઞાસા  જગાડનાર ગુરુ છે ક્યાં જે ભી લાયકાત ઊભી કરવા માં આવે છે ને નોકરિયાત વાડી હોય છે  નોકરી આપનાર  100 વિદ્યાર્થી પણ પોતાના હાથ નીચે ઊભા નથી કરી શકતા આજ નાં ગુરુઓ  તો બોલો ક્યાંથી ઊભા થાય 

જીવન માં ભણતર ની સાથે પોતાની અંદર આતુરતા ને સતત જગાડી રાખો અને જેટલું બને એટલું શીખો નહિતર એક દિવસ એવો આવશે ને આજ આતુરતા કાબલિયત ને  પોતાની અદર  જાગડવા માટે મોટીવેશન ના class લેવા નો વારો આવે  એમાં કોઈ ખોટું પણ નથી  પણ એક વાત છે જે ભણતર ના સમય જાગવી જોઈયે એ  આતુરતા ખોવાઈ  ગઈ હવે નિર્ણય કરવો પડે આપડા બાળક ની અંદર આતુરતા ની જ્યોત  જગાડો  તોજ  જીવન ની ખરી પરીક્ષા માં જ્યારે પોતાની લાયકાત સાબિત કરવા  જે ભી ફિલ્ડ માં ઉતરે ને એના હુનર ની કદર થાય ત્યારે એની અંદર એક જ વાત યાદ આવી જોઈએ હું હજી સરસ કરી  સકું એમ છું એજ આતુરતા  ......... જ છે જે માનવી માં સતત જીવત રહી શકે છે 


DBM પ્રસ્તુતિ

Tuesday, February 28, 2023

टीम वर्क से काम करने का जज्बा


टीम वर्क से काम करने का जज्बा


जितना आसान नहीं होता आसान होता है उस स्पर्धा में उतर अपनी तैयारी का प्रमाण देना चुनौती देकर कुछ फासलों के अतर से हार जाना  ही पूरी जीत होती है दुनिया के लिए वो जीता हुवा  खिलाड़ी है  बस उसके दिमाग में  चुनौती देने वाला अगली बार हावी ना हो जाय उसके लिए अपना और दिमाग लगाता है और चुनौती देने वाला स्पर्धक बन जाता हैं  और हारने  वाला अपनी उस गलती को फिर से सामना ना हो  उसके लिए अपनी हार  को जीत में बदल ने के लिए जुनून से लड़ने के लिए ओर जोर लगाता है  वो टीम के साथ टीम वर्क  से कैसे काम हो उस पर काम करता है  बस अपना  बेस्ट देने के लिए विजन बनाता है  उसका ये संघर्ष ही  उसकी जीत में तब्दील करने  के लिए टीम वर्क को ही अपना हथियार बनाकर  मिशन तक पहुंचने के  लिए  अपना बेस्ट देना ही अब उसका लक्ष्य होता है और  जीत की ओर आगे कदम बढ़ता है और सामने  वाली टीम  की तैयारी को फीकी साबित करने लिए अपनी रणनीति बनाता है उसकी  एक गलती से जीत का जश्न में केसे तब्दील हो उसके लिए अपनी टीम को 

 टीम वर्क से काम करने को जज्बा जब  टीम में आ जाए तो टीम को जीतने से कोई नहीं रोक सकता  तब जाकर टीम वर्क वाली टीम कामयाब होती हैं जरूरत है  टीम वर्क से काम करे  

जीत निश्चित हैं ये ही टीम वर्क का लक्ष्य होता है 


DBM की प्रस्तुती

Wednesday, September 21, 2022

खोया सा मन है मेरा



खोया सा मन है मेरा 

छाई है बैचेनी हर सोच के पीछे और एक सोच चलती है रास्ता दिल ने खोया है या मेरे मन ने दिमाग भी अब सुन्न हो जा रहा है मोटीवेशन के फॉर्मूलाभी फेल होते नजर आ रहे ही अगर कुछ पाया है तो खुशी नहीं है कुछ आशा बाध कर रखी भी है तो ये पूरी हुई भी कहा  है बस खोया हुवा मन मेरे सवालो के जवाब खोजने लगा हे जाने कीयु  मन मेरा कीन घेराव में  फसा है आज इसी सवालों के बीच सोच जंजीरो में जकड़ी हुई नजर आ रही है  खोया हुवा मन जाने क्यों बैचेन हो रहा है इसी सवालों में हम क्यों फसे जा रहे है.......खोया सा मन है मेरा मन कियू फसा जा रहा है........


लेखक

धीरेन्द्र महेता 



Monday, September 19, 2022

विश्वास की ज्योत जगाए रखनी होगी

 



विश्वास की ज्योत जगाए रखनी होगी


मन एक बार जरूर सोचता है की में जो कर रहा हु वो क्या सच मैं सही हे जेसे ही उस पहेलू को सोचने लगते  हे वही से अहंकार  का जन्म होता हे ओर कहेता हे मन चल छोड़  वो उसी लायक ही हे ओर अहंकार ओर मन के बीच अपने रिश्ते  नाते दोस्त कारोबार  सब दाव पर लग जाता हे क्योंकी हमे परिणाम की चिंता नहीं अहंकार की चिंता होती हे

इस सत्य कोई में भी ओर आप भी जुटला नहीं शकते 


सत्य तो लगता हे पर हम इस से आगे सोचते ही नहीं ओर सोचते हे तो ये अहंकार हमे रोक देता हे चाहो कितना भी योग सत्संग  करले हम  पर ये अहंकार की चादर जो हम ने अपने पर जो बिछाकर रखी हे उसे  हम निकाल ही नहीं पाते बस हमे लगता हे 

में ही सही हु बाकी सब मेरी नजर में गलत हे ये ही भावना हमारे घर कर जाती हे जो खुद को बदल ना चाहता हे पर वो सबकुछ त्याग करना चहता हे पर सिर्फ  त्याग करने का दिखवा करता हे असल में वो मन में रागदेष लेकर चलता हे पर सामने वाला इन्सान उस पर आंख बंद कर विश्वास करता हे ओर विश्वास करने वाला इन्सान ये समझ लेता हे की अब सबकुछ अच्छा होगा नीति अपनी बदल देता हे उसके प्रती आक्रोश सबकुछ छोड़ बस एक ही बात को पकड़ लेता कल जो हुआ वो बीता हुआ कल हे आज और आने वाले दिन में बेहतर ही होने वाला हे बस इसी आशा में जीने वाला इन्सान जीता चला जाता हे पर कुछ लोग इस जेसे लोगो पर अपना विश्वास जीत लेते हे ओर धीरे धीरे उसे अपने तरफ करते है फिर ऐसा गिरा देते हे की वो फिर से खड़ा होने के लायक ही नहीं होता  जिस इन्सान ने आंख बंद कर विश्वास किया उस इन्सान के प्रति आने वाले हर विचार उस इन्सान के लिए सब नजर अंदाज कर लिया ओर प्रेम की भावना उस धोखेबाज इन्सान के लिए  जगाई हुई इंसानियत विश्वाश आज फिर हार गया वो समझ ने लगा चाहे जितना  भी विश्वाश कर लो पर वो इन्सान अपनी ओकात जरूर बता देता हे अब उसके लिए फिर उठ कर खड़ा होना असभव लगने लगता हे वो अब किसी भी इन्सान पर विश्वास करना जहर पीना बरोबर लग रहा था अब ये सोचने लगता हे विश्वाश  हारा पर अभिमान जीत गया  जिन्हे अभिमान की सीढ़ी भी नही चढ़ी अब वो इन्सान उस ओर अपना रुख करे या न करे बस एक बात घर जरूर कर जाती है  चाहे इन्सान कितना भी विश्वास की डोर लंबी कर ले पर जिंदगी में एक  बार अहंकार के सामने पीट ही जाता हे पर जिसके रगोमें प्रेम आदर स्नमान भावना का दीप  इन्सान के अंदर जीवंत हे तब तक अहंकार  के आगे टूट नहीं सकता चट्टान की तरह हर मुश्केली से लड़ने के तैयार हो जाता हे पल भर की निराश की अनुभूति कर फिर हर तफ्लीको को लड़ने संघर्ष की  भावना से जिंदगी के इस खेल में अपने कर्मो को बड़ा करने उतार जाता हे और खुद को अकेला समझ ने बजाय वो ये समझ कर आगे बड़ जाता हे जब इस धरती पर मेरा जन्म हुआ़ था तब मुठ्ठी बंद कर आया था पर जिंदगी ने इसे दावपेच में लपेट लिया की बंद मुठ्ठी के वजहाया था पर मुझे इस धरती से बंद मुठ्ठी खोल कर ही जाना हे था अपनी लड़ाई कियू ना में अकेला लड़ ने चल पड़ता हे


ये घटना इन्सान के जीवन में एक बार दस्तक जरूर देती हे जरूर हे जिसके जीवन में विश्वास की डोर मजबूत हुई हे उस  इन्सान से कभी विश्वासघात  करना नही नाही उस इन्सान को मोका देना अपने तरफ का रवैया बदलने का 


विश्वास की  ये गोली हे जिसे हासिल करने बरसो निकल जाते हे पर एक बार टूट जाने पर  फिर से विश्वास कमाना कठिन हो जाता हे


मन को वो मोका कभी ना दो एक बार सोचने पर मजबूर हो जाए 


ये विषय ही ऐसा हे जो इन्सान के जीवन में हर रूप में आता हे ओर किस्से भी  हर रूप में  जन्म लेता हे

जरूरत हे यहां विश्वासघात को जन्म ही ना हो 

ये  खयाल इन्सान के अंदर विश्वास की ज्योत जगाने चाइए  इस ज्योत को जलाए रखना हर इन्सान की नैतिक जिमेदारी लेनी होगी  


तभी अहंकार पर विश्वास की जीत होगी जब हम अपने स्वार्थ के लिए किसीका विश्वास नही तोड़ेंगे


विश्वास की ज्योत जगाए रखनी होगी


लेखक

धीरेन्द्र महेता












Thursday, September 15, 2022

सफल होना है तो संघर्ष करना जरुरी है

 

सफल होना है तो संघर्ष करना जरुरी है

 एक किसान था वो बहुत दयालु था वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद करता। एक बार किसान अपने खेतों में काम कर रहा था तब उसे एक तितली का कोकून मिला। किसान उसे अपने घर लेकर आया और एक अच्छी सुरक्षित जगह पर रखकर उसे देखने लगा


थोड़ी देर बाद उस कोकून में एक छोटा सा छेद हुआ जिसमें से एक तितली बाहर आने के लिए बहुत संघर्ष करने लगी। किसान वहीं पर बैठकर यह सारा दृश्य देखने लगा। घंटो तक बहुत संघर्ष करने के 

बाद भी जब तितली उस कोकून को तोड़ने में असफल रही तो किसान को उस पर दया आ गई। 

किसान ने एक छोटी कैंची ली और कोकून का छेद को काटकर बड़ा कर दिया।


अब कोकून का छेद इतना बड़ा हो गया कि तितली बड़ी आसानी से उससे बाहर निकल आई । तितली को बाहर आता देख किसान भी खुश हुआ और अब किसान तितली के उड़ने का किसान इंतजार करने लगा। तितली बाहर आई तब उसके पंख बहुत छोटे और सिकुड़े हुए थे और उसका शरीर भी सूजा हुआ था। छोटे पंख और सूजा हुआ शरीर होने की वजह से वो कभी  वो कभी भी उड़ ही नहीं पाई।



बड़ा हृदय और दयालु स्वभाव वाला किसान यह समझ ही नहीं पाया की तितली के लिए कोकून से निकलने का संघर्ष ही उसे अपने आने वाली जिंदगी में उड़ने के काबिल बनाता है।


इस कहानी से हमने क्या सीखा?


दोस्तों यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां और संघर्ष ही हमें मजबूत और विकसित बनाती है। इसीलिए हमें समस्याओं का सामना स्वयं ही करना चाहिए। दूसरों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

Thursday, April 7, 2022

जिंदगी मैं तुजे बहुत कुछ शिखना है


जिंदगी मैं तुजे बहुत कुछ शिखना है 


बरसों से एक बात जरूर सुनता आया हु  जिंदगी मैं तुजे बहुत कुछ शिखना है  और बहुत कुछ देखना है पर ये लोग कीयु बोलते थे वो पता नही 
आज धीरे धीरे समझ आ रहा है इतनी आसन नहीं होती इस जिंदगी को जीना 
हर कदम पर कुछ ना कुछ शिखा ही देती है ये जिंदगी कुछ अच्छे लम्हों के साथ तो कुछ बुरे लम्हों के साथ सारी कड़ी जुड़कर रहे जाती हे जिंदगी के साथ हर लब्ज़ सही साबित भी होते तो कही लब्ज़ अपने आप पर हावी भी होते है ये सब जिंदगी को महेशूस करने से हीं  पता चलता हे  जिदंगी ही एक  संघर्ष  है उसके बिना कुछभी हासिल नहीं होता जो शॉर्टकट से हासिल किया हुवा मुकाम लंबे समय तक रहेता नहीं है  बस संघर्ष ही जिंदगी का परियाय है उसके बिना जिंदगी के हर पहलू जिंदगी के साथ जीते ही पता चल जाता  है की कोनसा इन्सान किस ओर चला जा रहा है

ये सब अपनी आखों से देखा हुवा वो सच है जो कोई भी इन्सान जुटला नहीं शकता 

आज पता चल रहा है की लोग कीयु कहेते थे बहुत कुछ शिखना और देखना बाकी है 


लेखक
धीरेन्द्र महेता

Friday, October 22, 2021

संघर्ष कोई भी हो पर त्याग की बड़ी भूमिका होती हे


 जिन्होंने बचपन खोया वही लोगों ने अपना इतिहास  बनाया इतिहास के पन्नों से जब भी पन्ने फिरा ओगे तब इन महापुरषों का जीकर होगा जेसे श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल डॉक्टर अंबेडकर वीर सावरकर अब्दुल कलाम ऐसे कई  लोगों ने अपना बचपन खोया और उन्होंने इतिहास बनाया हिम्मत नही  हारे ओर हौसला बनाए रखा 

जीवन मे एक बार किस्मत  मौका देती है 
बस उस मौके का फायदा उठाना हे और उसे पकड़ कर जीत की ओर बढ़ जाना हे वो लम्हा हमें ले आना हे जहा इतिहास के पन्नो पर अपना नाम सुनहरे अक्षरों मे लिखा जाए  यह प्रेरणा हमारे दिल में जगाना हे 

कइयों ने तो अपनी जिंदगीअभी बनाचुके हे और कई लॉग अपनी जिंदगी के अच्छे मुकाम तक पहुंचने के लिए  सबकुछ दाव पर है आज वो अपना इतिहास बनाने संघर्ष में जुड़े हे ईन्ही ने अपना युवानी का हसीन पल खोया हे बचपन खोया हे  हर व्यक्ति में किसी ना किसी तरह अपना कुछना कुछ छोड़ कर आज अपनी जिंदगी मे संघर्ष कर रहें हे क्योंकि इनका भविष्य इनके ही हाथ हे इसी लिए ये जो भी त्याग करते हे आने वाले कल में खुद को बेहतर पाने के लिए खुदका ओर देश का भविष्य के  लिए संघर्ष की सीढ़ियां चडते हे  l

बचपन हो युवान नी का कोई पल जोभी हो  जो हर कोई याद रखना चाहता हे  जब ये दो किरदार जिंदगी में दांव पर लगाते हे तो यकीन मानिए इन लोगो का इतिहास बनता हे

इन में से जीता जागता  प्रेरणा स्त्रोत हे तो माननीय नरेन्द्र मोदी जिन्हो ने अपने आप को संग्रश में उतारा ओर बडी कठीन परिस्थियो से गुजरते हुवे इन्होंने अपने आपको साबित किया ओर विश्वाश बनाया मुख्यमंत्री बने ओर आज के दौर प्रधानमंत्री बने ओर दुनिया अपने नाम का और देश का नाम रोशन किया
मुझे  गर्व  हे की मेरे जीते जी इन महान पुरष का वर्तमान के युग मे  सहभागी होने का अवसर मिला जब जब इस दशक का जिक्रर होगा तब इस पल का अहसास होगा

संघर्ष कोई भी हो पर त्याग की बड़ी भूमिका होती हे

लेखक 
धीरेन्द्  महेता

Tuesday, August 17, 2021

अभिमान सही है या विश्वास सही है





मन एक बार जरूर सोचता है की में जो कर रहा हु वो क्या सच मैं सही हे जेसे ही उस पहेलू को सोचने लगते  हे वही से अभिमान का जन्म होता हे ओर कहेता हे मन चल छोड़  वो उसी लायक ही हे ओर अभिमान ओर मन के बीच अपने रिश्ते  नाते दोस्त कारोबार  सब दाव पर लग जाता हे क्योंकी हमे परिणाम की चिंता नहीं अभिमान की चिंता होती हे
इस सत्य कोई में भी ओर आप भी जुटला नहीं शकते 

सत्य तो लगता हे पर हम इस से आगे सोचते ही नहीं ओर सोचते हे तो ये अभिमान हमे रोक देता हे चाहो कितना भी योग सत्संग  करले हम  पर ये अभिमान की चादर जो हम ने अपने पर जो बिछाकर रखी हे उसे  हम निकाल ही नहीं पाते बस हमे लगता हे 
में ही सही हु बाकी सब मेरी नजर में गलत हे ये ही भावना हमारे घर कर जाती हे जो खुद को बदल ना चाहता हे पर वो सबकुछ त्याग करना चहता हे पर सिर्फ  त्याग करने का दिखवा करता हे असल में वो मन में रागदेष लेकर चलता हे पर सामने वाला इन्सान उस पर आंख बंद कर विश्वाश करता हे ओर विश्वाश करने वाला इन्सान ये समझ लेता हे की अब सबकुछ अच्छा होगा नीति अपनी बदल देता हे उसके प्रती आक्रोश सबकुछ छोड़ बस एक ही बात को पकड़ लेता कल जो हुआ वो बीता हुआ कल हे आज और आने वाले दिन में बेहतर ही होने वाला हे बस इसी आशा में जीने वाला इन्सान जीता चला जाता हे पर कुछ लोग इस जेसे लोगो पर अपना विश्वाश जीत लेते हे ओर धीरे धीरे उसे अपने तरफ करते है फिर ऐसा गिरा देते हे की वो फिर से खड़ा होने के लायक ही नहीं होता  जिस इन्सान ने आंख बंद कर विश्वाश किया उस इन्सान के प्रति आने वाले हर विचार उस इन्सान के लिए सब नजर अंदाज कर लिया ओर प्रेम की भावना उस धोखेबाज इन्सान के लिए  जगाई हुई इंसानियत विश्वाश आज फिर हार गया वो समझ ने लगा चाहे जितना  भी विश्वाश कर लो पर वो इन्सान अपनी ओकात जरूर बता देता हे अब उसके लिए फिर उठ कर खड़ा होना असम्भव लगने लगता हे वो अब किसी भी इन्सान पर विश्वाश करना जहर पीना बरोबर लग रहा था अब ये सोचने लगता हे विश्वाश  हारा पर अभिमान जीत गया  जिन्हे अभिमान की सीढ़ी भी नही चढ़ी अब वो इन्सान उस ओर अपना रुख करे या न करे बस एक बात घर जरूर कर जाती है  चाहे इन्सान कितना भी विश्वाश की डोर लंबी कर ले पर जिंदगी में एक  बार अभिमान के सामने पीट ही जाता हे पर जिसके रगोमें प्रेम आदर स्नमान भावना का दीप  इन्सान के अंदर जीवंत हे तब तक अभिमान  के आगे टूट नहीं सकता चट्टान की तरह हर मुश्केली से लड़ने के तैयार हो जाता हे पल भर की निराश की अनुभूति कर फिर हर तफ्लीको को लड़ने संघर्ष की  भावना से जिंदगी के इस खेल में अपने कर्मो को बड़ा करने उतार जाता हे और खुद को अकेला समझ ने बजाय वो ये समझ कर आगे बड़ जाता हे जब इस धरती पर मेरा जन्म हुआ़ था तब मुठ्ठी बंद कर आया था पर जिंदगी ने इसे दावपेच में लपेट लिया की बंद मुठ्ठी के वजहाया था पर मुझे इस धरती से बंद मुठ्ठी खोल कर ही जाना हे था अपनी लड़ाई कियू ना में अकेला लड़ ने चल पड़ता हे

ये घटना इन्सान के जीवन में एक बार दस्तक जरूर देती हे जरूर हे जिसके जीवन में विश्वाश की डोर मजबूत हुई हे उस  इन्सान से कभी विश्वासघात  करना नही नाही उस इन्सान को मोका देना अपने तरफ का रवैया बदलने का 

विश्वास की  ये गोली हे जिसे हासिल करने बरसो निकल जाते हे पर एक बार टूट जाने पर  फिर से विश्वाश कमाना कठिन हो जाता हे

मन को वो मोका कभी ना दो एक बार सोचने पर मजबूर हो जाए 

ये विषय ही ऐसा हे जो इन्सान के जीवन में हर रूप में आता हे ओर किस्से भी  हर रूप में  जन्म लेता हे
जरूरत हे यहां विश्वासघात को जन्म ही ना हो 
ये  खयाल इन्सान के अंदर विश्वासकी ज्योत जगाने चाइए  इस ज्योत को जलाए रखना हर इन्सान की नैतिक जिमेदारी लेनी होगी  

तभी अभिमान पर विश्वास की जीत होगी जब हम अपने स्वार्थ के लिए किसीका विश्वाश नही तोड़ेंगे

विश्वाश की ज्योत जगाए रखनी होगी

लेखक
धीरेन्द्र महेता

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