किसान कर रहे है आंदोलन करना उनका अधिकार हे ये जरूरी भी है क्योंकि उन्हें खेत से उठाकर सभी किसानभाई ओ को सड़कों पर बिठा दिया गया है किसान विरोधी कानून बताकर इनहे गुमराह किया जा रहा है अगर ये किसान के हक़ वाला कानून ना होता थो आज सभी राज्य में ये आंदोलन हुवे होते और उनके सपोर्ट में 130 करोड़ की आबादी वाला भारत देश किसान के साथ खड़े होते और ये कानून कोईभी सरकार ले आती तब भी हम किसान के साथ होते पर ये कानून किसान विरोधी थोड़ी है अगर होता तो सिर्फ तीन राज्य में ये आंदोलन कर रहे है किसान की तरह बाकी के राज्य के किसान क्यों नहीं है बाकी के लोग समजदार है कानून को जानते है और समजते है पर कई किसान इस कानून के विरोध में जंग छेड़ दी है उन्हे भी पता है फिर भी इस आंदोलन में शामिल है पर एक बार तो किसानभाई ओ को सोचना चाईये था इनके इस कदम से कई लोग सदमे मै है एक बार भी कभी उन्होंने सोचा नहीं है और सोचा होगा अगर सोचा होता किसान भाईयो ने ये कदम नहीं उठा थे ऑर्र नाही किशिभी व्यक्ति के बहेकावे में नहीं आते पर आज कई साहूकार के यूनियन के बाहेकावे में आकर वो आज सड़कों पर है और आंदोलन कर रहे है
पर आज किसान भाइयों को मे बता ना चाहता हु जो किसान खुद भुखे रहे जाते थे वो ना समझ होकर आज सड़कों पर है कभी भी ऐसा पल याद नहीं आता कि अनाज की किलत हुई हो और किसान मोज करता नजर आया हो पर आज सभी को ये दिन देखने पड रहे है ऐसा कोई वायक्या याद नहीं कभी किसान के कारण भुखे सोना पड़ा हो किसान का रूप देवता के बाद उनका नाम आता है जो अन्नपूर्णा कहा गया है किसान ने जमी से सिचा हुआ अनाज हर वर्ग के लोगों तक पहुंचाया ये सोचने वाला किसान आज वो सडको पर है और हम काम पर कभी हमने उन लोगों तक हमने नए कानून है जो सरकार लाई है उसकी हर जानकारी उन लोगों तक हमने पहुंचाई नहीं है जो भी पहुंची हुई कुछ जानकारी गलत दी गई क्योंकि कुछ लोग किसान को अमीर स्वानलाबी बनते नहीं देख सकते क्योंकि उनकी बाज़ार बन्द हो रही है और खुद रास्ते पर आ जाएगे इसी डर से उनको ये कानून जो किसान विरोधी नहीं बल्कि किसान हित कानून है ये पता होने के बावजूद कुछ लोग इस वजह से सत्ताधारी ओ को डर सता रहा है जी हा इस वज़ह से किसान भाई के कंधों पर अपनी उमिद का दिया जलाकर इस कानून को उनका अधिकार छीनने वाला कानून बताकर उनको भड़का रहे है और उन्हे आंदोलन करने को मजबूर करवा कर गंधी राजनीति कर रहे है और अपनी रोटियां शेक रहे है और उनके साथ खुद भी आंदोलन कर है और नाम दिया जा रहा है किसान का आंदोलन पर असल में साहूकार के लोगों का आंदोलन है खुद परेशान है और बिचोलिये परेशान है इसलिए वो आज किसान के नाम पर ये हगामा खड़ा कर आज भारत वर्ष का नाम खराब कर रहे है
सरकार समझाते रहे गई ओर ये समजने से रहे और किसान के नेता बने हुवे यूनियन के नेता कानून वापस लो ये ही कहे रहे है और बस कहते रहेते है हर वकत कानून वापस नहीं तो घर वापसी नहीं
आज कितने भी दौर कि बाचित हो जाए पर ये सामजने से रहे क्योंकि उनको कानून वापसी चाहिए ताकि सफल सरकार को नीचा दिखाना चाहते है
आज मने और कई लोगो ने ये कानून के बारे जानकारी ली होगी हम जैसे कानून को समझ गए क्यों आया है कानून फिर भी हम हरोज खबर देखते है पर कभी एक ख़बर को अपने विचार को या इश कानून के बारे में हम ने कुछ लिखा नहीं नाही किसान को को हमारी भूख मिटा था है पर कभी भी हम उनके लिए समझाने नहीं गए या हम अच्छी सची ख़बर उन तक जानकारी नहीं पोहुचाई
अब उच्च नयायलय भी बीच का हल निकाल ने के लिए कमेटी को गठन किया ताकि सरकार और किसान मै ताल मेल हो पर हम अब भी चुप है और हम सब देख रहे है
हम सिर्फ बयान बाजी करते है सिर्फ देखते है और कमेंट करते है पर कभी भी में और आप इस बारे मे खुल के बोलते नहीं है आज मने हिम्मत दिखाई है कुछ अपने विचार रख कर कुछ विचार लिख कर आगे तक भेजे जिससे हम सरकार को और किसान को बता सके क्या गलत है और क्या सही
ये भाग 1 था .... कमक्ष
