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Sunday, June 7, 2020

स्पर्धक मै कीयु हु ओर कीयु होना चाहिए ओर कीयु शामिल होना चाहिए। लेखक धीरेन्द्र महेता

स्पर्धक मै कीयु  हु ओर कीयु होना चाहिए ओर कीयु शामिल होना चाहिए

उसका विवरण मैने दिया है  जिससे हम आत्मनिर्भर  बनने के लिए अपनी सोच को रखा हैओर आज हमे मोका मिला है विश्व के हर मोर्चे पर खरे उतरने के लिए   आज हमे स्पर्धक बनकर। विश्व में पंचम लेहेराना के मोका मिला है ओर आज हर मौके पर हर व्यक्ति को अपनी लोकल ब्रांड को वोकल बनाकर गोलोबल बने की दिशा में आगे बढ़ना होगा इस लिए स्पर्धक बनना जरूरी है 

1) स्पर्धक कोन है ?

 उसका जवाब एक ही है छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा स्पर्धक है पर हम अपने आप को स्पर्धक नहीं समजते

 स्पर्धक वो है जीने आगे बड़नेका जुनुन हो
पर क्या हम उसमे सामिल है?

अगर हम स्पर्धक है तो  हम ने उसका विवरण रखा है?

अगर रखा है तो हम किसका इंतज़ार कर रहे है ?

क्या हम स्पर्धक में सामिल होंने पर हार का डर है?

अगर डर नहीं है आगेभी बढ़ना है पर हमें 
स्पर्धक नहीं बनना है कयु?

इतने सारे सवाल कभी पूछे है  हम ने अपने आप से ?

हम जिस किसी क्षेत्र  में  है पर हमें सिर्फ अपनी जुरियात के आधार ही हम आगे बढेते हे ? ना

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2)  स्पर्धक बनना अब तय है?

अंदर से एक आवाज आना तय था अब बहुत हुवा अब तो स्पर्धक बनना ही हे 

इन में से कुछ लोग तो ॐ बोल कर कूदने की तैयारी में है

अबतक आप स्पर्धक नहीं थे अब स्पर्धक बनना है  क्यु अचानक ये आपको ये विचार  बदलना पड़ा?

आप को क्यु ऐसा लगा की अब समय हे अपने विचारोको  बदलने का इसलिये निर्णय लिया आपने 
 मे आप ही के विचारो पर focus दालना चाहुँगा क्युकि आप में वो बात है 

आप अपने आप को साबित करना चाहते हो

आप सब से अलग हो और आप कुछ नया करना चाहते हो

आप में वो बात है जो आप को प्रेरित करती है 
इस बजेसे आप स्पर्धक में शामिल हुवे

आप वो करना चाहते हो जो आप सब से अलग करना चाहते जिसे पता चले हम भी  पीछे नहीं है

हम अपने स्पर्धक को बताना चाहते हे की अब बहुत हुवाँ मे भी आपसे टक्कर लेने में काबिल हुँ अब में हर कोने से तुजे मात करना जानता हु और में तैयार भी हुँ

जब ये सारी बात समज में आती है तब एक स्पर्धक प्रतियोगिता में शामिल हो जाता हे 


3) प्रतियोगिता आखिर क्यु और किस लिये

प्रतियोगिता तब होती है जब कोई स्पर्धक अपना हुनर दिखा ने के लिये सामिल होता है 

तब वो अपने आप को कहाँ खड़ा पा रहा है उसका विवरण करता है  या आत्मं मथन करता है तब

ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिये वो अपनी रणनीति बनाता है  ओर उस ऑर्र सारा ध्यान केन्द्रित कर लेता है तब वो सारी बात को पेपर उतार लेता है

जब वो  पेपर प्लानिंग के अनुसार आगे बढ़ता है तब
अपने हुनर को साबित करने के लिए वो उस ओर बढ जाता है
फिर वो व्यक्ति किसीभी क्षेत्र पर हो खेलकूद पढ़ाई हो कारोबार हो या इस के अलावा कोई भी क्षेत्र में हो हमे अपना सारा ध्यान  presentation  की ओर  होता है जब  लोगो के सामने presentation
रखता है 

तब ये ही सोचता है में अपना जो भी दाव पे लगाता तब  उसे अपने आप से डर नहीं होता वो ये सोचता है मुजे खुद से जादा अपनी मेहनत पर होती है तब खुद का भोरोसा डगमगाता नहीं है इस क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति टीम वर्क से काम करती है तब उसकी महेनत विफल नहीं होती है

अब जीत तय हे ये तब हम मान लेते है तो दौड़ना शरू कर देता है  उस क्षेत्र में क्योंकि वो आत्मनिर्भर हो चुका होता है

कियुकी उसका vision और mission जब तय कार लेता है तो विजेता बनना तय हो जाता  है 


4)  स्पर्धक प्रतियोगिता और में

जब ये तिन  मुद्दों का मिश्रण हो तब  ये सवाल का जवाब  मिल ही जाता है  

पहले एक  व्यकती अपने आपको स्पर्धक नहीं समजता

जब उसे कोई अच्छी दिशा मिल जाती है तब उस में कुछ कर दिखाने की चाहत जग जाती है तब  वो किसी का स्पर्धक बनजाता है

जब स्पर्धक बनता है तब वो अपने स्पर्धक के अच्छी बुरी हर हरकत का वो point आउट करता है फिर वो paper पर  note down  करता है तब प्रतियोगिता में सामिल होता है

जब ये दो से शब्ध को समजता है तब वो अपने आप को बड़ा और अच्छा साबित करने के लिये वो अपनी शक्ति लगा देता है

तब उसे अपने आप को साबित कर वो जीत की और छलांग लगाता हे 

इस 4 विषय को जब आपने पड़ा होगा तब आपके मनमई कुछ ओर नया करने की भावना जगी होगी 
ओर उस विषय पर सोचा भी होगा ओर ये खयाल आया भी होगा आने वाला समय मेरा ओर मेरे परिवार ओर मेरे देश का होगा 

जब  ये सोच आई है था उसे दिशा दे इस सोच को दिशा की जरूरत है  मोच की नहीं 
आज हमारे एक सोच से जब हम आत्म निर्भर बनेंगे
तब स्पर्धक म शामिल होकर जीत का आनंद मिलता है ओर दूसरो को अपने वजह से उन्हे भी शिख ने का मोका मिलता है ओर जब वो भी शीख लेंगे तब  इस स्पर्धक में  प्रतियोगिता का कोई मतलब नहीं होगा  तब सब लोग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर विजेता बनेंगे

आशा है आपको ये सोच को पढ़कर  कोई सुझाव  आया होगा की इस मै ओर भी कुछ प्रकाश  डाल सकते थे  
या आपका कोई विषय हो जो आप मुझे भेज सकते है
धन्यवाद  आपने समय निकाल कर मेरी पोस्ट को पढ़ कर मै आपका ऋणी हुआ हु

लेखक
धीरेन्द्र महेता


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