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Friday, May 8, 2020

अपने जीवन में हालात को बदलने क्या करना होगा लेखक धीरेन्द्र महेता

अपने जीवन में हालात को बदलने क्या करना होगा  लेखक धीरेन्द्र महेता

सोच रहा था कब हालात बदलेंगे  पर कभी भी किसी भी व्यक्ति ने ये नहीं कहा इतने दिनमें कुछ दिनों में या कुछ महीनों में हालात बदलेंगे या सालो में बदलेगे बस थोड़ी धीरज रखो सब ठीक होगा बस बुरा वकत चल रहा है हिमत से काम लो सब सही हो जाएगा ये दिलासा अकसर लोगो को या मुझे कहीं से भी जुरुर सुनने मिलता है पर जो इस दौर से गुजर रहे है उसको कर्म के आधार पर या उसके  पिछले जन्म के पाप ऑर पुण्य के आधार पर जीवन में भुगतना पड़ता है  पर इस जन्म मै  वो पिछले जन्म के विपरित जिंदगी जी रहा है फिर भी उसे उस कर्म के अनुसार उसको इस जन्म में कष्ट भुगतना पड़ता है ना ही वो ठीक से जी सकता है ना ही वो ठीक से अपने परिवारमें खुशियां बाट सकता है ये काल का चक्र अपने जीवन में ऐसा फिरता है चाहकर भी वो वर्तमान में अच्छे कार्य कर ही नहीं सकता अगर कर भी लेता है फिर भी उसको फल मिल नहीं पाता अपने बिगड़े हुवे हालात को सुधारने में  क्या क्या नहीं करता में इस बात को विवरण में बताना नहीं चाहता ये सब ही लोग जानते है और ये अपने जीवन में खुद कर चुके है 
में सिर्फ और सिर्फ इस विषय में ये कहेना चाहता हूं की परिस्थिति अपने हाथ नहीं होती पर जो हाथ मै उसे सुधार ने मै अपना कीमती समय बरबाद कर देते है जो जैसा चल रहा है उसे उसी मोड़ पर खुला छोड़ दो उसे उसकी ओर अपना मन मत लगाओ बस एक ही काम है अपने पास जो है इस जीवन के हर पल खुशनुमा केसे बनाया जाए उस ओर अपनी इन्द्रियों को उस कार्य रथ करदो उस ओर बड़े कदम वर्तमान को आंनद ऑर भविष्य को आनंददायक बना पाओगे 
क्या हाथ से चला गया है उसकी चिंता करनी नहीं है बस उसे फिर से केसे अपने  हाथ में लाना है उस ओर अपनी शक्ति लगाओ वो ही अपना उद्देश्य होना चाहिए 
आज हम एक बात सोचते है उसने मेरे हक का था उस ने कीयु बीच में हाथ डाला एक बार सोचना जरूरी है हम जिसके काम के पीछे लगे थे वहीं काम के पीछे कोई ऑर होगा पर वो मेरे ही हक का था पर उस ने अपने आपको केसे सिद्ध किया की वोही हकदार बन गया ऑर मै कहा चूक गया जिस कारण वो उस काम के लिए उसने अपनी योग्यता सिद्ध की कई ऐसा भी होता है की वो अपनी चालाकी से हासिल कर लेता है पर हम कुछ कर नहीं पाते तब हम निराश होकर हम उसे कोसते है या अपने आप को दोषी मानते है की में ही कुछ नहीं कर पाया पर हम अपनी हिम्मत को पराजय में शामिल करते है और हम उस स्पर्धा से हम बाहर होते ही हम अपने आप को हारा हुआ इनसान समजते है ओर बस एकबात हमारे जहेन में रहे जाती है की उसने मेरे साथ ऐसा कीयू किया बस सारा समय उसी ऑर हम सोचते है ऑर जो काम हमारे हाथ होता है हम उसे भी बिगाड़ ने में तुले होते है  हमारा ध्यान सिर्फ ऑर सिर्फ आपने काम पर होना चाहिए ऑर अपने लक्ष्य पर अगर हम इतना हम कर लेते है तो हम जीवन के हर मोड़ पर खरे उतरेंगे नाही हने पछाड़ सकता है बस धैरिय रखना होगा ऑर अपने आप पर सैयम रखना होगा ये हालात हमें बदलने होते है नाही कोई मदद में आता है नाही अपने आशु पोछने आता है बस ये हालात का सामना हमें मक्कम मन से करना होगा
तभी ये हालात को हम बदल पाएंगे

लेखक धीरेन्द्र महेता

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