मन और दिल का घमासान में फसा बिचारा बदलाव
मन के उतार चढ़ाव कभी दिल से मेल नहीं खाते दिल और मन एक साथ जरूर है
पर बदलाव लाने मैं मन हमेशा आगे जल्दी होता नही है क्योंकि वो स्टोरेज बॉक्स है अगला पिछला सब एक साथ परोस देता है फिर क्या लगे रहो उलजनी मैं पिछली गलती को ज्यादा याद कर अच्छा भुला दिया जाता है और दिल सारे तथ्य सामने रख भी देता है तो बिचारा दिल पहले से हारा समझ ही लेता है पर दिल से सोचा हुवा और मन ने सोचा हुवा मैं ज्यादा अंतर नहीं होता मन अपने आपको ब्रह्मांड समझता है और दिल विशाल दरिया इस बीच मैं जो अच्छा कुछ हे तो अच्छा हो भी जाए तब नेकी कर दरिया में डाल वाला शब्द बोलते हुवे हम नजर आयेगे तब दिल क्रेडिट लेगा मन कहेगा मेरे उदार वाद रवैये से ये सफल हुवा है दिल अपनी ओर बात कहेगा और मन अपनी बात ओर फिर क्या था बस एक दूसरे की तना तनी में लगे रहते हे इस बीच में कोई आ जाए बस फिर क्या गुस्सा सारा सातवे आसमान पर सवारी कर बस बरस पड़ोगे ये सब जानते हुवे भी उसकी कोई गलती नही फिर भी हम कभी कभी हम अपनी गलती स्वीकारते भी नही ये हर व्यक्ति के साथ नही होता नाही कोई माहोल देख कर भी नहीं होता है जब ये काबू छूट जाता है दिल और मन एक होते है फिर ये सब होता है ये चाहे में हु या आपसब ये वाकया हर किसी के साथ हो चुकी है
इस बीच एक और बात रखूंगा
अपने ही शरीर मैं मन भी और दिल भी फिर भी मतभेद और अपने और पराए की क्या बात करे पहले तो हम ही सही नही है और ओरो पर क्यों सवाल खड़े करते है इस बीच में बदलाव शब्द आता हैं इस बार पहले जैसा नहीं होगा में ध्यान रखूंगा या रखुगी पर इस पर अमल करने वालो की संख्या काफी कम है पर इस बात पर ज्ञान देने वालो हजारों मिलगे और उनकी बातो फॉरवर्ड करते करते कभी भी अपने अंदर बदलाव की उम्मीद भी जन्म नहीं लेती बिचारा बदलाव शब्द डीसनरी से गायब ना हो जाए इश्का ख्याल हमे रखना होगा बदलाव एकदम से नहीं आता धीरे धीरे आता है आज एक बात उठा कर उसे अमल फिर दूसरा फिर तिसरा ऐसे आगे बढ़े तो ही बदलाव आयेगा नाही फिर जो डीसनरी से बदलाव गायब होने वाला था कभी नही होगा.
बस हर व्यक्ति को बदलाव के प्रयास करने चाइए ये ही उद्देश्य लेकर चले

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