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Tuesday, November 24, 2020

जिंदगी में बहुत बडा फील करना हो तो इस मोटीवेशन को जरूर सुने और आत्मविश्वास बढ़ाएं


जिंदगी में बहुत बडा फील करना हो तो इस मोटीवेशन को जरूर सुने और आत्मविश्वास  बढ़ाएं 
 


Tuesday, November 10, 2020

कैसे कैसे लोग मिलेंगे ! Sonu Sharma ! Network Marketing Tips


कैसे कैसे लोग मिलेंगे ! Sonu Sharma ! Network Marketing Tip!  GREAT MOTIVATION
https://www.youtube.com/watch?v=fBsOUjeJ1lQ

Sunday, October 11, 2020

सफलता उसको मिलती है जो संघर्ष करता है




सफलता उसको मिलती है जो संघर्ष करता है

By Sandeep Maheshwari Hindi



 

Sunday, June 7, 2020

स्पर्धक मै कीयु हु ओर कीयु होना चाहिए ओर कीयु शामिल होना चाहिए। लेखक धीरेन्द्र महेता

स्पर्धक मै कीयु  हु ओर कीयु होना चाहिए ओर कीयु शामिल होना चाहिए

उसका विवरण मैने दिया है  जिससे हम आत्मनिर्भर  बनने के लिए अपनी सोच को रखा हैओर आज हमे मोका मिला है विश्व के हर मोर्चे पर खरे उतरने के लिए   आज हमे स्पर्धक बनकर। विश्व में पंचम लेहेराना के मोका मिला है ओर आज हर मौके पर हर व्यक्ति को अपनी लोकल ब्रांड को वोकल बनाकर गोलोबल बने की दिशा में आगे बढ़ना होगा इस लिए स्पर्धक बनना जरूरी है 

1) स्पर्धक कोन है ?

 उसका जवाब एक ही है छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा स्पर्धक है पर हम अपने आप को स्पर्धक नहीं समजते

 स्पर्धक वो है जीने आगे बड़नेका जुनुन हो
पर क्या हम उसमे सामिल है?

अगर हम स्पर्धक है तो  हम ने उसका विवरण रखा है?

अगर रखा है तो हम किसका इंतज़ार कर रहे है ?

क्या हम स्पर्धक में सामिल होंने पर हार का डर है?

अगर डर नहीं है आगेभी बढ़ना है पर हमें 
स्पर्धक नहीं बनना है कयु?

इतने सारे सवाल कभी पूछे है  हम ने अपने आप से ?

हम जिस किसी क्षेत्र  में  है पर हमें सिर्फ अपनी जुरियात के आधार ही हम आगे बढेते हे ? ना

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2)  स्पर्धक बनना अब तय है?

अंदर से एक आवाज आना तय था अब बहुत हुवा अब तो स्पर्धक बनना ही हे 

इन में से कुछ लोग तो ॐ बोल कर कूदने की तैयारी में है

अबतक आप स्पर्धक नहीं थे अब स्पर्धक बनना है  क्यु अचानक ये आपको ये विचार  बदलना पड़ा?

आप को क्यु ऐसा लगा की अब समय हे अपने विचारोको  बदलने का इसलिये निर्णय लिया आपने 
 मे आप ही के विचारो पर focus दालना चाहुँगा क्युकि आप में वो बात है 

आप अपने आप को साबित करना चाहते हो

आप सब से अलग हो और आप कुछ नया करना चाहते हो

आप में वो बात है जो आप को प्रेरित करती है 
इस बजेसे आप स्पर्धक में शामिल हुवे

आप वो करना चाहते हो जो आप सब से अलग करना चाहते जिसे पता चले हम भी  पीछे नहीं है

हम अपने स्पर्धक को बताना चाहते हे की अब बहुत हुवाँ मे भी आपसे टक्कर लेने में काबिल हुँ अब में हर कोने से तुजे मात करना जानता हु और में तैयार भी हुँ

जब ये सारी बात समज में आती है तब एक स्पर्धक प्रतियोगिता में शामिल हो जाता हे 


3) प्रतियोगिता आखिर क्यु और किस लिये

प्रतियोगिता तब होती है जब कोई स्पर्धक अपना हुनर दिखा ने के लिये सामिल होता है 

तब वो अपने आप को कहाँ खड़ा पा रहा है उसका विवरण करता है  या आत्मं मथन करता है तब

ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिये वो अपनी रणनीति बनाता है  ओर उस ऑर्र सारा ध्यान केन्द्रित कर लेता है तब वो सारी बात को पेपर उतार लेता है

जब वो  पेपर प्लानिंग के अनुसार आगे बढ़ता है तब
अपने हुनर को साबित करने के लिए वो उस ओर बढ जाता है
फिर वो व्यक्ति किसीभी क्षेत्र पर हो खेलकूद पढ़ाई हो कारोबार हो या इस के अलावा कोई भी क्षेत्र में हो हमे अपना सारा ध्यान  presentation  की ओर  होता है जब  लोगो के सामने presentation
रखता है 

तब ये ही सोचता है में अपना जो भी दाव पे लगाता तब  उसे अपने आप से डर नहीं होता वो ये सोचता है मुजे खुद से जादा अपनी मेहनत पर होती है तब खुद का भोरोसा डगमगाता नहीं है इस क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति टीम वर्क से काम करती है तब उसकी महेनत विफल नहीं होती है

अब जीत तय हे ये तब हम मान लेते है तो दौड़ना शरू कर देता है  उस क्षेत्र में क्योंकि वो आत्मनिर्भर हो चुका होता है

कियुकी उसका vision और mission जब तय कार लेता है तो विजेता बनना तय हो जाता  है 


4)  स्पर्धक प्रतियोगिता और में

जब ये तिन  मुद्दों का मिश्रण हो तब  ये सवाल का जवाब  मिल ही जाता है  

पहले एक  व्यकती अपने आपको स्पर्धक नहीं समजता

जब उसे कोई अच्छी दिशा मिल जाती है तब उस में कुछ कर दिखाने की चाहत जग जाती है तब  वो किसी का स्पर्धक बनजाता है

जब स्पर्धक बनता है तब वो अपने स्पर्धक के अच्छी बुरी हर हरकत का वो point आउट करता है फिर वो paper पर  note down  करता है तब प्रतियोगिता में सामिल होता है

जब ये दो से शब्ध को समजता है तब वो अपने आप को बड़ा और अच्छा साबित करने के लिये वो अपनी शक्ति लगा देता है

तब उसे अपने आप को साबित कर वो जीत की और छलांग लगाता हे 

इस 4 विषय को जब आपने पड़ा होगा तब आपके मनमई कुछ ओर नया करने की भावना जगी होगी 
ओर उस विषय पर सोचा भी होगा ओर ये खयाल आया भी होगा आने वाला समय मेरा ओर मेरे परिवार ओर मेरे देश का होगा 

जब  ये सोच आई है था उसे दिशा दे इस सोच को दिशा की जरूरत है  मोच की नहीं 
आज हमारे एक सोच से जब हम आत्म निर्भर बनेंगे
तब स्पर्धक म शामिल होकर जीत का आनंद मिलता है ओर दूसरो को अपने वजह से उन्हे भी शिख ने का मोका मिलता है ओर जब वो भी शीख लेंगे तब  इस स्पर्धक में  प्रतियोगिता का कोई मतलब नहीं होगा  तब सब लोग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर विजेता बनेंगे

आशा है आपको ये सोच को पढ़कर  कोई सुझाव  आया होगा की इस मै ओर भी कुछ प्रकाश  डाल सकते थे  
या आपका कोई विषय हो जो आप मुझे भेज सकते है
धन्यवाद  आपने समय निकाल कर मेरी पोस्ट को पढ़ कर मै आपका ऋणी हुआ हु

लेखक
धीरेन्द्र महेता


Sunday, May 10, 2020

दुसरो की लकीर कम करने से अच्छा अपनी लकीर बड़ी करना शीखो--- लेखक धीरेन्द्र महेता


दुसरो की लकीर कम करने से अच्छा अपनी लकीर बड़ी करना शीखो

हम ये सोचते है की हमारी लकीर बड़ी हे हमें कुछ डर नहीं इसलिये वो दुसरो की बढ़ती लकीर को छोटी करने की कोशिश करते हे उसे आगे बढ़ने रोखते है 
क्युकि इनको डर है उसकी बढ़ती लकीर का कही उनकी लकीर छोटी ना हो जाये इस वजह से हम उस व्यक्ति के प्रति देखने का नजरिया बदल देते हे
और वो व्यक्ति हमें ना पसंद लगता हे  पर हम उसकी हर बातको ना सुनकर उसे रोक देते है या उसे हा हा ठीक है ये कहे कर हम उस बात को अनसुना कर देते है ओर उसके  विचार को नहीं देखते  नाही गौर करते या  हम उसकी बातको मजाक में उड़ाना शुरू कर देते है वो छोटा आदमी क्या करता वो अपने उपरी अधिकारी से परेशान होता है  कयोकी वो उसे ऊपर आने ही नहीं देता पर वो अपने काम पर निष्ठावान होता है पर वो कुछ नहीं कर पाता पर बड़ी लकीर वाले ऐसे लोगो को परेशान करने में एक भी कसर छोड़ ते नहीं है 

जैसे मान लो आपके पास आकर कहेता है आज जल्द जाने मिलेगा हम कहेते है आज  काफी काम है आज आप नहीं जा सकते ओर बिचारा क्या करता वो फिर काम मै लग जाता है ओर तय किये समय उनुसार चला जाता हे  या हम बहुत कुछ सूना कर जाने  देते हे ओर उसे निराश कर अपने तरफ देखनेका नज़रिया  बदलने के लिए मजबुर करते है ओर वो हमारी बुराई पीठ पीछे करता है
पर इस्के जिम्मेवार हम ही है जल्दी तो गया पर क्या लेकर गया उस समय उसने जेली परेशानी किसीको नज़र नहीं आती 
हम ओरो को ये जताते है की देखा कितना दबदबा है हमारा हमे कोई बोलने वाला नहीं  मै जो भी कर रहा हूं वो कंपनी के नियम अनुसार ही कर रहा हूं पर वो ये नहीं जानते की उस व्यक्ति ने अपने साथ एक ही बात ले गया कितना भी काम करो पर कोई  फायदा नहीं उपरी अधिकारी के रहेते हम छोटे  के छोटे ही रहेंगे उसे दूसरो के प्रति कोई लगाव नहीं है ओर वो छोटा व्यक्ति अपना दायरा सीमित कर लेता है 

उपरी अधिकारी जबतक ये नहीं सोचेगे की मै भी छोटे दायरे से इस बड़े दायरे में  आया हूं अगर में उस छोटी  लकीर को बड़े लकीर में सामिल करुगा तो  मेरी भी लकीर अपने आप बड़ी होगी पर ये सिर्फ ओर सिर्फ अपना स्वार्थ देखते है ओर साहेब के सामने  छोटे कर्मचारी की बुराइयां शुरु कर देता है ये जताता है की मै कितना ध्यान देता हूं बस ये जताने के चक्कर में रात दिन लगा रहेत्ता है

इस समाज में हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अधिकार है जब तक उपरी अधिकारी छोटे कर्मचारी के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चले तो एक दिन हम अपनी टहनी हम खुद ही काट लेगे ओर हम उस समय कुछ नहीं कर पायेगे

जरूरत है सिर्फ ओर सिर्फ एक बात समझ ने की
हम ऐसे क्षेत्र में काम करते है जहा ये भेदभाव करने की जरूरत क्यो है ? 

आज हमे एक बात समझे की जरूरत है 
जब हम अपनी लकीर बड़ी करते रहेगे और वो अपनी छोटी लकीर बड़ी करते रहेगे तब छोटी बड़ी दोनो में तालमेल होगा तब वो दिनभी कुछ और होगा तब छोटी लकीर का फासला मिट जाएगा  और हर होदे के अफसर मिल जुलकर काम करते नजर आए गे

तब कोई प्रतिस्पर्धी नहीं होगा 

                                   लेखक धीरेन्द्र महेता







Friday, May 8, 2020

अपने जीवन में हालात को बदलने क्या करना होगा लेखक धीरेन्द्र महेता

अपने जीवन में हालात को बदलने क्या करना होगा  लेखक धीरेन्द्र महेता

सोच रहा था कब हालात बदलेंगे  पर कभी भी किसी भी व्यक्ति ने ये नहीं कहा इतने दिनमें कुछ दिनों में या कुछ महीनों में हालात बदलेंगे या सालो में बदलेगे बस थोड़ी धीरज रखो सब ठीक होगा बस बुरा वकत चल रहा है हिमत से काम लो सब सही हो जाएगा ये दिलासा अकसर लोगो को या मुझे कहीं से भी जुरुर सुनने मिलता है पर जो इस दौर से गुजर रहे है उसको कर्म के आधार पर या उसके  पिछले जन्म के पाप ऑर पुण्य के आधार पर जीवन में भुगतना पड़ता है  पर इस जन्म मै  वो पिछले जन्म के विपरित जिंदगी जी रहा है फिर भी उसे उस कर्म के अनुसार उसको इस जन्म में कष्ट भुगतना पड़ता है ना ही वो ठीक से जी सकता है ना ही वो ठीक से अपने परिवारमें खुशियां बाट सकता है ये काल का चक्र अपने जीवन में ऐसा फिरता है चाहकर भी वो वर्तमान में अच्छे कार्य कर ही नहीं सकता अगर कर भी लेता है फिर भी उसको फल मिल नहीं पाता अपने बिगड़े हुवे हालात को सुधारने में  क्या क्या नहीं करता में इस बात को विवरण में बताना नहीं चाहता ये सब ही लोग जानते है और ये अपने जीवन में खुद कर चुके है 
में सिर्फ और सिर्फ इस विषय में ये कहेना चाहता हूं की परिस्थिति अपने हाथ नहीं होती पर जो हाथ मै उसे सुधार ने मै अपना कीमती समय बरबाद कर देते है जो जैसा चल रहा है उसे उसी मोड़ पर खुला छोड़ दो उसे उसकी ओर अपना मन मत लगाओ बस एक ही काम है अपने पास जो है इस जीवन के हर पल खुशनुमा केसे बनाया जाए उस ओर अपनी इन्द्रियों को उस कार्य रथ करदो उस ओर बड़े कदम वर्तमान को आंनद ऑर भविष्य को आनंददायक बना पाओगे 
क्या हाथ से चला गया है उसकी चिंता करनी नहीं है बस उसे फिर से केसे अपने  हाथ में लाना है उस ओर अपनी शक्ति लगाओ वो ही अपना उद्देश्य होना चाहिए 
आज हम एक बात सोचते है उसने मेरे हक का था उस ने कीयु बीच में हाथ डाला एक बार सोचना जरूरी है हम जिसके काम के पीछे लगे थे वहीं काम के पीछे कोई ऑर होगा पर वो मेरे ही हक का था पर उस ने अपने आपको केसे सिद्ध किया की वोही हकदार बन गया ऑर मै कहा चूक गया जिस कारण वो उस काम के लिए उसने अपनी योग्यता सिद्ध की कई ऐसा भी होता है की वो अपनी चालाकी से हासिल कर लेता है पर हम कुछ कर नहीं पाते तब हम निराश होकर हम उसे कोसते है या अपने आप को दोषी मानते है की में ही कुछ नहीं कर पाया पर हम अपनी हिम्मत को पराजय में शामिल करते है और हम उस स्पर्धा से हम बाहर होते ही हम अपने आप को हारा हुआ इनसान समजते है ओर बस एकबात हमारे जहेन में रहे जाती है की उसने मेरे साथ ऐसा कीयू किया बस सारा समय उसी ऑर हम सोचते है ऑर जो काम हमारे हाथ होता है हम उसे भी बिगाड़ ने में तुले होते है  हमारा ध्यान सिर्फ ऑर सिर्फ आपने काम पर होना चाहिए ऑर अपने लक्ष्य पर अगर हम इतना हम कर लेते है तो हम जीवन के हर मोड़ पर खरे उतरेंगे नाही हने पछाड़ सकता है बस धैरिय रखना होगा ऑर अपने आप पर सैयम रखना होगा ये हालात हमें बदलने होते है नाही कोई मदद में आता है नाही अपने आशु पोछने आता है बस ये हालात का सामना हमें मक्कम मन से करना होगा
तभी ये हालात को हम बदल पाएंगे

लेखक धीरेन्द्र महेता

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Wednesday, April 22, 2020

मदद लेखक धीरेन्द्र महेता

         


   एक ऐसी कहानी जो सबके में को छू जाए गई ओर स्वाभिमान को केसे जिंदा रहेत  है वो दर्शाया गया है इस कहानी मै इस कहानी का नाम है मदद            

                                   मदद

उस समय की बात है जिस समय कोई व्यक्ति हो उसे हर तरह की मदद की जाती थी पर आज के दौर में मदद करनी हो तो दस बार सोचते है  पर पहले ऐसा नहीं था पहले कोई मदद करता भी मदद आख बन्द कर उसकी मदद कर लेता कोई सोच नहीं कोई स्वार्थ नहीं  सिर्फ कर्म ही सेवा समझ कर मदद करते थे तब कोई भी फायदे की बात या  इच्छा भी कभी रखते नहीं पर आज के काल में पहले फायदा फिर मदद  बिना मतलब से कोई मदद नहीं सबको फायदा ही चाइए  बिना स्वार्थ से ना परिवार ना दोस्त नाही कारोबार नाही कारबोर में काम करने वाला व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ फायदा  बिना मतलब का कोई मदद नहीं करता नाही उसके काम आता फिर भी आज एक ऐसी कहानी आपके सामने ला रहा हूं जो आपको जनजोरकर रख देगी  आप एक बार अवश्य सोचने के मजबुर हो जाओगे  की जो में कर रहा हूं सही है या नहीं  मैने ऐसा कियू किया 

बस छोटी सी प्रस्तावना आपके समक्ष रख रहा हूं आपको जरूर पसंद आयेगी 

सामान्य परिवार से आने वाला राजू ओर संजू जो एक छोटे गाव में रहेता था उस गांव का नाम रतनपुर उत्तर प्रदेश में आता था जो महेज दो हज़ार आबादी वाला गांव था उस गांव में एक साहूकार था जो अपने गांव के लोगो को अपनी धाक से अपना रुदबा दबदबा था वो सबको डरता धमकाता रहेता  
राजू ओर संजू अपने पिताजी के कर्ज के दबे हुवे थे
 उसके पिताजी  चार साल पहले ही चल बसे राजू के घर में उसकी मा और छोटा भाई। संजू दोनों ही अपनी मा के लिए जो बंन पड़े वो करते थे पिताजी हैं चल बसे तब ये दोनों बेटों पर कर्ज का बोझ लाद गए आखिर पिताजी करते भी तो क्या राजू और संजू  पढ़या लिख्या और काबिल बनाया जब पिताजी चल बसे तो तब दोनों भाई उतर पदेश में वाराणसी शहर में पढ़ाई  कर वहीं  नोकरी कर रहे थे दोनों भाई महेंनती थे  एक भाई राजू ऑटो मोबाइल की कपनी में एकाउंट का काम करता था और छोटा संजू वाराणसी में ही कलेक्टर था ये दोनों ने रात दिन एक कर पढ़ाई की अपने को पिताजी का जो सपना था वो पूरा किया  समय निकाल कर वो अक्सर अपने माता को मिलने रतनपुर जरूर जाते  वो भी दोनों भाई एक साथ जब भी गांव जाते अपने माता  के लिए कुछ ना कुछ जरूर ले जाते और उनको दुनिया कि सारी खुशियां देते  उन्हें अपने गांव से अपने साथ शहर लेके आए उन्होंने अपने माता को नामी शहर मथुरा गोकुल बरसाना वृन्दावन  दिल्ली लाल किला आग्रा का ताजमहल  सबकुछ दोनों बेटों ने दिखाया जो उन्हे देखने का जो सपना था वो इन दोनों बेटों ने पूरा किया अच्छा खाना अच्छी होटलों में रहे सब कुछ किया और अपने वाराणसी में गंगा स्नान करवाया मानो सारा सुख दोनों बेटों ने बिना बोले इनकी जोली में खुशियों से भर दी कुछ दिनों तक दोनों बेटो के साथ दिन गुजार ने बाद उन्होंने अपने गांव लौट जाने की बात की तब दोनों बेटों ने मा से वहा ना जाने की बात की पर पिताजी ने लिए कर्ज की याद दिलाई ओर  कहा अगले हफ्ते फसल की कटाई है जो फसल कटाई करनी होगी जो भी पैसा आएगा कुछ अपने पास रखकर लिए कर्ज का भुगतान करना होगा  और हमारी जो जमीन है जो साहूकार के पास गिरवी है उस कर्ज जों लिया था  वो तुम्हारी पढ़ाई लिखाई मै मने लगा दिए बस वो जमीन छुड़ानी है तब राजू ने कहा कितना कर्ज लिया था हमने  मा ने कहा वो कर्ज का सुत पकड़कर 14 लाख, जों अब करीब 12लाख देने बाकी है ये सुनकर दोनों भाई सुन हो गए और बोले जो खेत में फसल होती है वो करीब कितने की होती है  मा ने  कहा फसल होती जरूर है पर हमने उचित मोल नहीं मिलता और फसल 75 हज़ार की हो तो सिर्फ हमारे हाथ सिर्फ 15 हज़ार थमा देते है ओरु उसमे से सुत काटकर 7से 8 हज़ार  देकर बोलते है जल्द से जल्द हमारे पैसे चुका दो नहीं तो जमीन से भी हाथ धो बैठोगै ये सुनकर दोनों भाई का खून खोल ने लगा इतनी अच्छी फसल होती है सुत और कर्ज पकड़ कर  इतना भी नहीं होता  और सुत का सुत भी जोड़ ले और कर्ज पकड़ लो फिर भी हमने जमीन कब की छूट जाती पर इस साहूकार ने सिर्फ और सिर्फ अपनी तिजोरी ही भरी  मा आप चिंता ना करो जमीन हम छुड़ाकर रहेंगे  पिताजी ने लिया हुआ कर्ज हम जरूर चुकाएंगे ये आश्वाशन देकर मा  को सो जाने को कहा रात बहुत हो गई है कल आपको गांव छोड़ने जाना है पूरी रात राजू और संजू को नींद नहीं आई  हमारी पढ़ाई लिखाई और हमारे सपने पूरा करने रात दिन एक कर दिए और हमे इस मुकाम तक लाने में अपने सपने दाव  पर लगा दिए और हम कुछ नहीं कर पाए राजू और संजू इसी सोच मै रातभर सो नहीं पाए  और अगले दिन मा को लेकर गांव रतनपुर चल दिए वहा पोहचते ही दोनों भाई ने अपने फसल की कटाई तक रुकने का मन बना लिया था और अपने कामकाज से ओर अतिरिकत छुट्टी के ले ली और गांव में रुक ने का फैसला लिया तीन दिन बाद फसल की कटाई कर उसे साहूकार के पास लेकर नहीं गए और उन्होंने गांव वालो के साथ अपनी फसल सरकारी मंडी में बेच कर सवा लाख  रुपए जुटाए लिए और गांव वालो को भी फायदा हुआ  साहूकार तिलबिला उठा वो बोला अगर आपने आगे से सरकारी मंडी मै अनाज बेचा तोअच्छा नहीं होगा उसका परिणाम गलत होगा  तब संजू ने कहा हम बताया जाए हमारे पिताजी अबतक कितना कर्ज लिया और सुत के साथ कितना चुकाया उसका लेखा जोखा बताए तब साहूकार में अपने मुनीम से कहा इनका बई खाते में कितना लेने निकलता है  तब मुनीम ने कहा सुत का सुत पकड़ कर 12 लाख  समय मुड़ी ना चुकाने पर उसका दंड पकड़ कर अब 15,लाख देना होगा संजू भड़क उठा और बोला अब तक जितनी भी फसल कटी और सरकारी आंकड़े हिसाब से हमने आपको 60 हज़ार के हिस्सा और 7 हज़ार सुत जो लिया उसे जोड़ कर अबतक हमारे हिसाब से  10 लाख 5 हज़ार हम चुका चुके हैअभी के 95 हज़ार लो अब से जोभी बाकी है हम अगली फसल मै आपको चुका देगे अब  हमारा कर्ज महज़ 4लाख रहे गए है वो भी हम जल्द चुका देगे  साहूकार को चेतावनी देते हुवे कहा अगर आगे से गांव के किसीभी वसूली की या परेशान किया तो कलेक्टर साब को बोल देगे आप गांववालो को अपने तानासाही मै अत्याचार कर रहे हो इतना बोल चल दिया  मा को आश्वाशन देकर कहा चिंता ना करे अब हमारी जमीन जल्द  हमारे पास होगी बाकी रकम बैंक में जमा करवा कर वो अपने घर आए खाना खाकर मा बोली बेटा आज तुमने जो किया है वो गांव वाले और हम कभी भी  भूलेगे नहीं मा एक बात बोलूं आप गांव वालो को और साहूकार को मत बताना इस जिले का और इस गांव का नया कलेक्टर कोन है मा बोली कियू मै नहीं चाहता कि उन्हें पता चले बस थोड़े दिन और मै अपना तबादला करवा कुगा ताकि इन जैसे साहूकार को सबक सिखा सकु राजू बोला हा भाई सही बात बताई  मा निश्चिंत हो जाओ अब नया सूरज निकलेगा जो गांव वालो को अपने फसल की सही दाम ओर सही खुशियां मिलेगी बस थोड़े दिन और अगले दिन को सुबह अपने माता के चरण स्पर्श कर शहर की ओर चल दिए और वाराणसी पोहुचकर अपने गांव के हालात और अत्याचार का विवरण सरकार के समक्ष रखे सरकार ने संजू को जल्द इस समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया करीब कई महीने गुजर गए और साल गुजर गए पर कुछ कर नहीं पाए इस दौरान एक घटना हुई एक सड़क हादसे में जो व्यक्ति घायल हुआ उसकी कार को एक ट्रक ने हाईवे पर  इस कार को ओवरटेक कर ने में एक्सिडेंट हुआ ओर ट्रक वाला भाग गया और इस समय राजू उसी हाईवे से गुजर रहा था कोई उसे हस्पताल नहीं लेकर जा  रहे थे बड़ी गम्भीर रुप  घायाल हुआ था  एक क्षण भी सोचे बिना अपनी बाइक को साइड पर खड़ी कर उस घायल आदमी को ऑटो में बिठाकर पास के हस्पताल मै भर्ती करवाया और पुलिस को जान कार दी और  थोड़ी देर में डॉक्टर ने कहा उनकी हालत बेहत गम्भीर है उनको खून की शकत आवश्यकता है o ग्रुप खून का प्रबंध ना हुआ तो बचने की गुंजाइश कम है डॉक्टर ने o ग्रुप खून चाहिए पर हस्पताल मै उपलब्ध नहीं है और ब्लड बैंक मै भी नहीं राजू चिंता मै पड़ गया ओर उसे याद आया कि पिछली बार सरकारी  रक्त दान का शिबिर था तब भाई के खून की जांच हुई तब o ग्रुप  ही था बही से फोन लगाया और कहा एक घायल आदमी है जो मै हस्पताल लाया हूं उन्हें o  ग्रुप का खून की जरूरत है भाई आपका खुंन ग्रुप भी o ही है आप जल्द हस्पताल आ जाओ भाई करीब 15 मिनट में पोहच गए और अपना खून उस आदमी को दिया करीब दो बोतल की जरूरत पड़ी और वो आदमी बच गया बस अभी वो भान मै नहीं आया था तब तक उस आदमी का जो घायल था उसका नाम  सुरजसिंह था वो रतनपुर का ही रहेने वाला था उसके पिताजी भानसिंह साहूकार थे इसका पता चलते ही राजू ने उनके गांव मै फोन कर दिया ओर कहा की आपका बेटा सड़क हादसे मै घायल हुआ था और संजीवनी हस्पताल मै भर्ती है वाराणसी मै अब वो खतरे के बाहर है आप जल्द आ जाए इतना कहकर फोन रखकर  राजू और संजू ने सुरजसिह को देख कर वो चले गए और दूसरी तरफ राजू ने दी हुई जानकारी के अनुसार ट्रक के चालक को पुलिस ने उसे पकड़ लिया और दूसरे दिन पुलिस ने ट्रक की पहेचान के लिए राजू को बुलाया और राजू ने उस ट्रक को देख ओर गाड़ी नंबर को पहेचान लिया और  कहा ये ही ट्रक था और दूसरी तरफ अस्पताल मै सुरजसिह ने उस व्यक्ति को मिलने की जिद की फिर ही वो हस्पताल से घर जाएगा हस्पताल से डॉक्टर ने फोन लगाया कहा राजू जी सुरजसिह ने आप  दोनों को हस्पताल बुलाया  है और कहा सुरजसिह की अब तबीयत ठीक है और वो स्वस्थ है और वो लोग  आपका अभिवादन करना चाहते है राजू ने कहा हमे नहीं मिलना बोल दो वों लोग  इन्कार कर  रहे है  और उनसे कहो हमने अपना फ़र्ज़ निभाया है और हम ये सब करके हमे कोई बड़ा काम नहीं किया हमने मानव धर्म निभाया है बस हम नहीं मिलसकते इस तरफ से डॉक्टर से फोन लेकर भानसिह ने कहा बस हम आपको मिलना चाहते है और मेरा बेटा बोल रहा है कि आप लोग मिलने नहीं आओगे तबतक  मै यहां से घर नहीं जाउगा  ये सुनकर राजू ओर संजू ना बोल नहीं पाए  और कल मिल ने आयेगे ऐसा आश्वाशन देकर उनकी बात मान ली और फोन रख दिया दोनों भाई ना चाहते हुए भी उन्हे मिलना पड़ेगा क्योंकि उनके गांव के ही साहूकार के बेटे की जान बचाई  थी पर जब जान बचाते समय हमे पता ही नहीं था ये कोन है जब  पता चला वो हमारे गांव की था तब वो  लोग तो हमारा एहसान समझेंगे और  येही तो हम नहीं चाहते की वो लोग हमसे मिले पर ईश्वर को ये ही मनजुर होगा ये समझ कर  दूसरे दिन मिलने चले गए सुरजसिह को सुबह ही मिलने पहोच गए और सुरजसिह को डॉक्टर ने बताया राजू ने तुम्हे सड़क हादसे से आपको हस्पताल लाए जब आप जीवन मुत्यु के बीच आप जुल रहे थे तब आपको खून काफी बहे गया था तब इन्हीं के भाई संजू ने आपको खून दिया  जो बड़ी मुश्किल से मिलता है  वो o ग्रुप  है जों सही समय पर आपकी जान बच गई ये सुनकर सुरजसिह ने इन दोनों भाई को आभार व्यकत किया और उन्हं देवता मान उनके पैर पड़े ओर  दोनों भाइयों ने ये मान देखकर खुशी से आंख भर आई और उस समय उनके पिताजी भानसीह ने ये दोनों भाईयो को देखकर ओर सभी बात सुनकर भाव विभोर हो गए और इन दोनों भाई वहा से जा ही रहे थे साहूकार ने तब  दोनों भाईयो को रोकलिया कहा आज मेरे गांव के दो वीरो ने मेरे बेटे की जान बचा कर मेरे बेटे को नया जीवनदान दिया है ये बात मै कभी नहीं भूलूंगा ये बोल कर आभार व्यकत किया  और दोनों भाई ने इजाजत लेकर वहा से निकल गए ओर वो अपने अपने काम पर चले गए  और भानसिह सुरजसिह ओर उनकी माता के साथ वो अपने गांव रतनपुर पोहच गए और साहूकार भांनसिह ने राजू के पिताजी की जमीन के दस्तावेज और उनका बच्चा हुआ  कर्ज माफ कर दिया और पूरे गांव मै ये कहेलवाया हमारे पास जीनलोगो की जमीन गिरवी है ओर कर्ज लिया है वो सब माफ कर दिया  है राजू के पिताजी के दस्तावेज के पेपर राजू की मा को सौंप दिए ओर कहा आज से आपके ऊपर कोई कर्ज नहीं है ये सुनकर राजू की मा भाव विभोर हुई कहा क्यों की इतनी महेरबानी  तब साहूकार ने कहा मेरे पुत्र को नया जीवन दान दिया है  आपके दोनों बेटों ने जब जीवन  मुत्यू के बीच जुल रहा था तब आपके बेटो ने मेरे बेटे को जानते भी नहीं थे अनजान मे की गई मदद आज  मुझे परित कर रही है की हर कोई मदद स्वार्थ से नहीं होती है अब तो मै आपका ऋणी हूं ये सुनकर राजू की मा हाथ जोड़ धन्यवाद कहा साहूकार ने कहा मुझे हाथ जोड़ने चाहिए पर उसी दिन राजू ओर संजू गांव आए ओर साहूकार के हाथ में  4लाख हाथ मै थमा कर कहा हमने कोई एहसान नहीं किया है सिर्फ हमने मानव धर्म निभाया है ओर कहा साहूकार जी हमने आप से कहे अनुसार आपका पूरा बाकायदा जो कर्ज था जो हमने आपको सारे चुका दिया है इस बीच हमने अपने पिताजी को खोया है ओर आज हमने अपने पिताजी की इच्छा को पूर्ण कर हमने पिताजी को कर्ज से मुक्त कर उनके दिल से भार हमेशा के लिए दूर कर दिया है जो आज तक चैन की नींद सो नहीं पाए आज उनके आत्मा को शांति मिलेगी  साहूकार ने कहा ये पैसे तुम वापस ले लो आप दोनों भाई ने मेरे बेटे की जान बचाई भले अनजाने मै बचाई पर में ये पैसे ले नहीं  सकता राजू बेटा ये पैसे रखलो राजू ने कहा ये पैसे आपके है जो हमारे पिताजी ने कर्ज के रूप में लिए थे वो आज पूरा हो गया  ये आपको रखने ही  होगे अगर हमने कोई मदद की है वो सिर्फ ओर सिर्फ निस्वार्थ भाव से बिना आशा से हमने की थी और उसमें कोई स्वार्थ होता तो आज हम ये पैसे लौटा ते नहीं आपसे सौदा करते पर हमने जो भी किया जो  स्वार्थ के खातिर नहीं किया आज जो भी हुआ ओर हमने किया  वो सब अपने अपने कर्म ही थे जो एक दूसरे के काम आए मदद कोई किसी की मोताज नहीं बिना स्वार्थ से की गई मदद  इंसान को मानव धर्म शिखता है  जो हम सब को करना चाहिए ओर आज आपने सारे गांव के लोगो की जमीन वापस लोटा कर ओर कर्ज माफ कर आपने भी निस्वार्थ से आपने ये कदम आपने उठाए और आपने ये कदम लिया  ये सब आपने जो भी किया निस्वार्थ किया जो आपको हमारी  मदद द्वारा प्ररेणा मिली और हाथ जोड़कर अभी वादन कर साहूकार अपने घर चले गए 
राजु ओर संजू गांव ही रुख गये और राजु उपनी ऑटो मोबाइल की नोकरी छोड़ उसने खती करने का निर्णय लिया  और संजू ने कलक्टर था उसने अपना तबदला अपने जिले में करवा दिया  देखते ही देखते रतुनपुर गांव आज वो सारी सुविधाएं मिलती है जो शहर मै होती है और दूसरी तरफ  साहूकार भांनसिह ओर कलेक्टर संजू के साथ मिलकर अपने गांव की तरक्की में साथ दे रहे है


मदद सिर्फ ओर सिर्फ बिना स्वार्थ ओर जात पात देखकर नहीं करनी चाहिए 

                                        लेखक
  1.                               धीरेन्द्र महेता


Monday, March 30, 2020

कोराना वायरस से जितना है तो घर पर ही रहो

जिंदगी के हर मोड़ पर जिंदगी क्या कुछ नहीं सिखाती आज हम अपने ही घर मै कैद है
दूसरो ने गलती की उनकी वजह से हम अपने ही घर में कैद है आज हमने हजारों की मौत होते हुवे  देखा
और आगे कितनी मोत होगी कोई नहीं जानता
कोराना वायरस की वजह से और कितनी मौत होगी

 पर इसका गुनेगार चीन ही जीमेदार है ये कोरोना वायरस चीन से ही पूरे विश्व में फेला और सात लाख से ऊपर लोग  इसकी जपेट मै है और ये आंकड़े और भी बढ़ेगा चीन ने में जो नागरिक मरे उसकी संख्या सिर्फ और सिर्फ 3500 के आसपास बताई जा रही है और ये आंकड़े सही भी नहीं है फिर भी ये आंकड़े गलत है जादा हो सकते है  खेर ये क्यों जुठ बोला जा रहा है ये वक्त रहते सामने जरूर आ जाएगा

अभी के लिए मेरा एक ही उदेश है आपको इस कोराना वायरस से ना डरेअपने घर मै ही रहे और जरूरत न होने पर बाइक  कार  लेकर ना निकले की कोन बाहर है कोन नहीं हमारी एक गलती हमारे परिवार के लिए जान लेवा हो सकती है और दूसरो के लिए भी जान लेवा भी साबित होगी
सरकार द्वारा किए गए हर संभव सुविधाओ का लाभ ले आपके लिए ही सरकार जीमेदारी से अपना काम कर रही है और कोराना से ना डरते हुवे वे आपके लिए मेरे लिए आज हमारे जीवन की रक्षा कर रहे है पर संभव उपाय तलाश रही है और वे अपने आप को साबित करने लिए कटिबद्ध है दूसरी तरफ डॉक्टर मेडिकल स्टोर जनरल स्टोर
सब्जीवाले  आज आपके लिए हीतो खड़े है इनका सुक्रिया करना चाइए और ये प्राथना भी करे इनका जीवन लंबा हो  और हर वे निरोगी  रहे  और स्वस्थ रहे ये कामना हम तय दिल से करते है और आगे भी करेगे पर इतना ही नहीं हमें अपना फर्ज निभाने होगा
हमे दी गई तय सीमा तक हमें घर से बाहरना निकले पूरे 21 दिन मतलब 14 अप्रैल तक हमें अपने आप पर अनुशासन  लाना होगा हमारे परिवार और दूसरे परिवार के लिए हमें घर से बाहर नहीं जाएंगे
ये कोराना वायरस जान लेवा है ये पूरे मानव को खतम कर देगा  अगर  हमने हमारे प्रधानमंत्री और  हमारे मुख्यमंत्री  ने दी गई हिदायते और डॉक्टर द्वारा दी गई सावधानी बरतने की हिदायते जरूर माने  और इस में कोई भी चूक ना हो ये हमारी  नैतिक जिमेदारी  है हम जिमेदार नागरिक है तो हम इस कोराना वायरस को हराने के लिए हमें अपने घर में ही रहेना होगा

मुझे आशा है की आप ये बात को जरूर समझेंगे और एक बात बोडर पर जवान दुश्मन को खत्म करता है और आज हमे अपने मानव रहित बोम कोराना वायरस को हमे सब एक होकर जिम्मेदार नागरिक बनकर हम ये युद्ध में  कोराना वायरस को हराना है इसके लिए हम दृढ़ से मुकाबला करेगे और इश जंग में हमे कोराना वायरस को मात देने है और हमे इस में विजय प्राप्त करनी है

जय हिन्द ।

धीरेन्द्र महेता

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