एक ऐसी कहानी जो सबके में को छू जाए गई ओर स्वाभिमान को केसे जिंदा रहेत है वो दर्शाया गया है इस कहानी मै इस कहानी का नाम है मदद
मदद
उस समय की बात है जिस समय कोई व्यक्ति हो उसे हर तरह की मदद की जाती थी पर आज के दौर में मदद करनी हो तो दस बार सोचते है पर पहले ऐसा नहीं था पहले कोई मदद करता भी मदद आख बन्द कर उसकी मदद कर लेता कोई सोच नहीं कोई स्वार्थ नहीं सिर्फ कर्म ही सेवा समझ कर मदद करते थे तब कोई भी फायदे की बात या इच्छा भी कभी रखते नहीं पर आज के काल में पहले फायदा फिर मदद बिना मतलब से कोई मदद नहीं सबको फायदा ही चाइए बिना स्वार्थ से ना परिवार ना दोस्त नाही कारोबार नाही कारबोर में काम करने वाला व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ फायदा बिना मतलब का कोई मदद नहीं करता नाही उसके काम आता फिर भी आज एक ऐसी कहानी आपके सामने ला रहा हूं जो आपको जनजोरकर रख देगी आप एक बार अवश्य सोचने के मजबुर हो जाओगे की जो में कर रहा हूं सही है या नहीं मैने ऐसा कियू किया
बस छोटी सी प्रस्तावना आपके समक्ष रख रहा हूं आपको जरूर पसंद आयेगी
सामान्य परिवार से आने वाला राजू ओर संजू जो एक छोटे गाव में रहेता था उस गांव का नाम रतनपुर उत्तर प्रदेश में आता था जो महेज दो हज़ार आबादी वाला गांव था उस गांव में एक साहूकार था जो अपने गांव के लोगो को अपनी धाक से अपना रुदबा दबदबा था वो सबको डरता धमकाता रहेता
राजू ओर संजू अपने पिताजी के कर्ज के दबे हुवे थे
उसके पिताजी चार साल पहले ही चल बसे राजू के घर में उसकी मा और छोटा भाई। संजू दोनों ही अपनी मा के लिए जो बंन पड़े वो करते थे पिताजी हैं चल बसे तब ये दोनों बेटों पर कर्ज का बोझ लाद गए आखिर पिताजी करते भी तो क्या राजू और संजू पढ़या लिख्या और काबिल बनाया जब पिताजी चल बसे तो तब दोनों भाई उतर पदेश में वाराणसी शहर में पढ़ाई कर वहीं नोकरी कर रहे थे दोनों भाई महेंनती थे एक भाई राजू ऑटो मोबाइल की कपनी में एकाउंट का काम करता था और छोटा संजू वाराणसी में ही कलेक्टर था ये दोनों ने रात दिन एक कर पढ़ाई की अपने को पिताजी का जो सपना था वो पूरा किया समय निकाल कर वो अक्सर अपने माता को मिलने रतनपुर जरूर जाते वो भी दोनों भाई एक साथ जब भी गांव जाते अपने माता के लिए कुछ ना कुछ जरूर ले जाते और उनको दुनिया कि सारी खुशियां देते उन्हें अपने गांव से अपने साथ शहर लेके आए उन्होंने अपने माता को नामी शहर मथुरा गोकुल बरसाना वृन्दावन दिल्ली लाल किला आग्रा का ताजमहल सबकुछ दोनों बेटों ने दिखाया जो उन्हे देखने का जो सपना था वो इन दोनों बेटों ने पूरा किया अच्छा खाना अच्छी होटलों में रहे सब कुछ किया और अपने वाराणसी में गंगा स्नान करवाया मानो सारा सुख दोनों बेटों ने बिना बोले इनकी जोली में खुशियों से भर दी कुछ दिनों तक दोनों बेटो के साथ दिन गुजार ने बाद उन्होंने अपने गांव लौट जाने की बात की तब दोनों बेटों ने मा से वहा ना जाने की बात की पर पिताजी ने लिए कर्ज की याद दिलाई ओर कहा अगले हफ्ते फसल की कटाई है जो फसल कटाई करनी होगी जो भी पैसा आएगा कुछ अपने पास रखकर लिए कर्ज का भुगतान करना होगा और हमारी जो जमीन है जो साहूकार के पास गिरवी है उस कर्ज जों लिया था वो तुम्हारी पढ़ाई लिखाई मै मने लगा दिए बस वो जमीन छुड़ानी है तब राजू ने कहा कितना कर्ज लिया था हमने मा ने कहा वो कर्ज का सुत पकड़कर 14 लाख, जों अब करीब 12लाख देने बाकी है ये सुनकर दोनों भाई सुन हो गए और बोले जो खेत में फसल होती है वो करीब कितने की होती है मा ने कहा फसल होती जरूर है पर हमने उचित मोल नहीं मिलता और फसल 75 हज़ार की हो तो सिर्फ हमारे हाथ सिर्फ 15 हज़ार थमा देते है ओरु उसमे से सुत काटकर 7से 8 हज़ार देकर बोलते है जल्द से जल्द हमारे पैसे चुका दो नहीं तो जमीन से भी हाथ धो बैठोगै ये सुनकर दोनों भाई का खून खोल ने लगा इतनी अच्छी फसल होती है सुत और कर्ज पकड़ कर इतना भी नहीं होता और सुत का सुत भी जोड़ ले और कर्ज पकड़ लो फिर भी हमने जमीन कब की छूट जाती पर इस साहूकार ने सिर्फ और सिर्फ अपनी तिजोरी ही भरी मा आप चिंता ना करो जमीन हम छुड़ाकर रहेंगे पिताजी ने लिया हुआ कर्ज हम जरूर चुकाएंगे ये आश्वाशन देकर मा को सो जाने को कहा रात बहुत हो गई है कल आपको गांव छोड़ने जाना है पूरी रात राजू और संजू को नींद नहीं आई हमारी पढ़ाई लिखाई और हमारे सपने पूरा करने रात दिन एक कर दिए और हमे इस मुकाम तक लाने में अपने सपने दाव पर लगा दिए और हम कुछ नहीं कर पाए राजू और संजू इसी सोच मै रातभर सो नहीं पाए और अगले दिन मा को लेकर गांव रतनपुर चल दिए वहा पोहचते ही दोनों भाई ने अपने फसल की कटाई तक रुकने का मन बना लिया था और अपने कामकाज से ओर अतिरिकत छुट्टी के ले ली और गांव में रुक ने का फैसला लिया तीन दिन बाद फसल की कटाई कर उसे साहूकार के पास लेकर नहीं गए और उन्होंने गांव वालो के साथ अपनी फसल सरकारी मंडी में बेच कर सवा लाख रुपए जुटाए लिए और गांव वालो को भी फायदा हुआ साहूकार तिलबिला उठा वो बोला अगर आपने आगे से सरकारी मंडी मै अनाज बेचा तोअच्छा नहीं होगा उसका परिणाम गलत होगा तब संजू ने कहा हम बताया जाए हमारे पिताजी अबतक कितना कर्ज लिया और सुत के साथ कितना चुकाया उसका लेखा जोखा बताए तब साहूकार में अपने मुनीम से कहा इनका बई खाते में कितना लेने निकलता है तब मुनीम ने कहा सुत का सुत पकड़ कर 12 लाख समय मुड़ी ना चुकाने पर उसका दंड पकड़ कर अब 15,लाख देना होगा संजू भड़क उठा और बोला अब तक जितनी भी फसल कटी और सरकारी आंकड़े हिसाब से हमने आपको 60 हज़ार के हिस्सा और 7 हज़ार सुत जो लिया उसे जोड़ कर अबतक हमारे हिसाब से 10 लाख 5 हज़ार हम चुका चुके हैअभी के 95 हज़ार लो अब से जोभी बाकी है हम अगली फसल मै आपको चुका देगे अब हमारा कर्ज महज़ 4लाख रहे गए है वो भी हम जल्द चुका देगे साहूकार को चेतावनी देते हुवे कहा अगर आगे से गांव के किसीभी वसूली की या परेशान किया तो कलेक्टर साब को बोल देगे आप गांववालो को अपने तानासाही मै अत्याचार कर रहे हो इतना बोल चल दिया मा को आश्वाशन देकर कहा चिंता ना करे अब हमारी जमीन जल्द हमारे पास होगी बाकी रकम बैंक में जमा करवा कर वो अपने घर आए खाना खाकर मा बोली बेटा आज तुमने जो किया है वो गांव वाले और हम कभी भी भूलेगे नहीं मा एक बात बोलूं आप गांव वालो को और साहूकार को मत बताना इस जिले का और इस गांव का नया कलेक्टर कोन है मा बोली कियू मै नहीं चाहता कि उन्हें पता चले बस थोड़े दिन और मै अपना तबादला करवा कुगा ताकि इन जैसे साहूकार को सबक सिखा सकु राजू बोला हा भाई सही बात बताई मा निश्चिंत हो जाओ अब नया सूरज निकलेगा जो गांव वालो को अपने फसल की सही दाम ओर सही खुशियां मिलेगी बस थोड़े दिन और अगले दिन को सुबह अपने माता के चरण स्पर्श कर शहर की ओर चल दिए और वाराणसी पोहुचकर अपने गांव के हालात और अत्याचार का विवरण सरकार के समक्ष रखे सरकार ने संजू को जल्द इस समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया करीब कई महीने गुजर गए और साल गुजर गए पर कुछ कर नहीं पाए इस दौरान एक घटना हुई एक सड़क हादसे में जो व्यक्ति घायल हुआ उसकी कार को एक ट्रक ने हाईवे पर इस कार को ओवरटेक कर ने में एक्सिडेंट हुआ ओर ट्रक वाला भाग गया और इस समय राजू उसी हाईवे से गुजर रहा था कोई उसे हस्पताल नहीं लेकर जा रहे थे बड़ी गम्भीर रुप घायाल हुआ था एक क्षण भी सोचे बिना अपनी बाइक को साइड पर खड़ी कर उस घायल आदमी को ऑटो में बिठाकर पास के हस्पताल मै भर्ती करवाया और पुलिस को जान कार दी और थोड़ी देर में डॉक्टर ने कहा उनकी हालत बेहत गम्भीर है उनको खून की शकत आवश्यकता है o ग्रुप खून का प्रबंध ना हुआ तो बचने की गुंजाइश कम है डॉक्टर ने o ग्रुप खून चाहिए पर हस्पताल मै उपलब्ध नहीं है और ब्लड बैंक मै भी नहीं राजू चिंता मै पड़ गया ओर उसे याद आया कि पिछली बार सरकारी रक्त दान का शिबिर था तब भाई के खून की जांच हुई तब o ग्रुप ही था बही से फोन लगाया और कहा एक घायल आदमी है जो मै हस्पताल लाया हूं उन्हें o ग्रुप का खून की जरूरत है भाई आपका खुंन ग्रुप भी o ही है आप जल्द हस्पताल आ जाओ भाई करीब 15 मिनट में पोहच गए और अपना खून उस आदमी को दिया करीब दो बोतल की जरूरत पड़ी और वो आदमी बच गया बस अभी वो भान मै नहीं आया था तब तक उस आदमी का जो घायल था उसका नाम सुरजसिंह था वो रतनपुर का ही रहेने वाला था उसके पिताजी भानसिंह साहूकार थे इसका पता चलते ही राजू ने उनके गांव मै फोन कर दिया ओर कहा की आपका बेटा सड़क हादसे मै घायल हुआ था और संजीवनी हस्पताल मै भर्ती है वाराणसी मै अब वो खतरे के बाहर है आप जल्द आ जाए इतना कहकर फोन रखकर राजू और संजू ने सुरजसिह को देख कर वो चले गए और दूसरी तरफ राजू ने दी हुई जानकारी के अनुसार ट्रक के चालक को पुलिस ने उसे पकड़ लिया और दूसरे दिन पुलिस ने ट्रक की पहेचान के लिए राजू को बुलाया और राजू ने उस ट्रक को देख ओर गाड़ी नंबर को पहेचान लिया और कहा ये ही ट्रक था और दूसरी तरफ अस्पताल मै सुरजसिह ने उस व्यक्ति को मिलने की जिद की फिर ही वो हस्पताल से घर जाएगा हस्पताल से डॉक्टर ने फोन लगाया कहा राजू जी सुरजसिह ने आप दोनों को हस्पताल बुलाया है और कहा सुरजसिह की अब तबीयत ठीक है और वो स्वस्थ है और वो लोग आपका अभिवादन करना चाहते है राजू ने कहा हमे नहीं मिलना बोल दो वों लोग इन्कार कर रहे है और उनसे कहो हमने अपना फ़र्ज़ निभाया है और हम ये सब करके हमे कोई बड़ा काम नहीं किया हमने मानव धर्म निभाया है बस हम नहीं मिलसकते इस तरफ से डॉक्टर से फोन लेकर भानसिह ने कहा बस हम आपको मिलना चाहते है और मेरा बेटा बोल रहा है कि आप लोग मिलने नहीं आओगे तबतक मै यहां से घर नहीं जाउगा ये सुनकर राजू ओर संजू ना बोल नहीं पाए और कल मिल ने आयेगे ऐसा आश्वाशन देकर उनकी बात मान ली और फोन रख दिया दोनों भाई ना चाहते हुए भी उन्हे मिलना पड़ेगा क्योंकि उनके गांव के ही साहूकार के बेटे की जान बचाई थी पर जब जान बचाते समय हमे पता ही नहीं था ये कोन है जब पता चला वो हमारे गांव की था तब वो लोग तो हमारा एहसान समझेंगे और येही तो हम नहीं चाहते की वो लोग हमसे मिले पर ईश्वर को ये ही मनजुर होगा ये समझ कर दूसरे दिन मिलने चले गए सुरजसिह को सुबह ही मिलने पहोच गए और सुरजसिह को डॉक्टर ने बताया राजू ने तुम्हे सड़क हादसे से आपको हस्पताल लाए जब आप जीवन मुत्यु के बीच आप जुल रहे थे तब आपको खून काफी बहे गया था तब इन्हीं के भाई संजू ने आपको खून दिया जो बड़ी मुश्किल से मिलता है वो o ग्रुप है जों सही समय पर आपकी जान बच गई ये सुनकर सुरजसिह ने इन दोनों भाई को आभार व्यकत किया और उन्हं देवता मान उनके पैर पड़े ओर दोनों भाइयों ने ये मान देखकर खुशी से आंख भर आई और उस समय उनके पिताजी भानसीह ने ये दोनों भाईयो को देखकर ओर सभी बात सुनकर भाव विभोर हो गए और इन दोनों भाई वहा से जा ही रहे थे साहूकार ने तब दोनों भाईयो को रोकलिया कहा आज मेरे गांव के दो वीरो ने मेरे बेटे की जान बचा कर मेरे बेटे को नया जीवनदान दिया है ये बात मै कभी नहीं भूलूंगा ये बोल कर आभार व्यकत किया और दोनों भाई ने इजाजत लेकर वहा से निकल गए ओर वो अपने अपने काम पर चले गए और भानसिह सुरजसिह ओर उनकी माता के साथ वो अपने गांव रतनपुर पोहच गए और साहूकार भांनसिह ने राजू के पिताजी की जमीन के दस्तावेज और उनका बच्चा हुआ कर्ज माफ कर दिया और पूरे गांव मै ये कहेलवाया हमारे पास जीनलोगो की जमीन गिरवी है ओर कर्ज लिया है वो सब माफ कर दिया है राजू के पिताजी के दस्तावेज के पेपर राजू की मा को सौंप दिए ओर कहा आज से आपके ऊपर कोई कर्ज नहीं है ये सुनकर राजू की मा भाव विभोर हुई कहा क्यों की इतनी महेरबानी तब साहूकार ने कहा मेरे पुत्र को नया जीवन दान दिया है आपके दोनों बेटों ने जब जीवन मुत्यू के बीच जुल रहा था तब आपके बेटो ने मेरे बेटे को जानते भी नहीं थे अनजान मे की गई मदद आज मुझे परित कर रही है की हर कोई मदद स्वार्थ से नहीं होती है अब तो मै आपका ऋणी हूं ये सुनकर राजू की मा हाथ जोड़ धन्यवाद कहा साहूकार ने कहा मुझे हाथ जोड़ने चाहिए पर उसी दिन राजू ओर संजू गांव आए ओर साहूकार के हाथ में 4लाख हाथ मै थमा कर कहा हमने कोई एहसान नहीं किया है सिर्फ हमने मानव धर्म निभाया है ओर कहा साहूकार जी हमने आप से कहे अनुसार आपका पूरा बाकायदा जो कर्ज था जो हमने आपको सारे चुका दिया है इस बीच हमने अपने पिताजी को खोया है ओर आज हमने अपने पिताजी की इच्छा को पूर्ण कर हमने पिताजी को कर्ज से मुक्त कर उनके दिल से भार हमेशा के लिए दूर कर दिया है जो आज तक चैन की नींद सो नहीं पाए आज उनके आत्मा को शांति मिलेगी साहूकार ने कहा ये पैसे तुम वापस ले लो आप दोनों भाई ने मेरे बेटे की जान बचाई भले अनजाने मै बचाई पर में ये पैसे ले नहीं सकता राजू बेटा ये पैसे रखलो राजू ने कहा ये पैसे आपके है जो हमारे पिताजी ने कर्ज के रूप में लिए थे वो आज पूरा हो गया ये आपको रखने ही होगे अगर हमने कोई मदद की है वो सिर्फ ओर सिर्फ निस्वार्थ भाव से बिना आशा से हमने की थी और उसमें कोई स्वार्थ होता तो आज हम ये पैसे लौटा ते नहीं आपसे सौदा करते पर हमने जो भी किया जो स्वार्थ के खातिर नहीं किया आज जो भी हुआ ओर हमने किया वो सब अपने अपने कर्म ही थे जो एक दूसरे के काम आए मदद कोई किसी की मोताज नहीं बिना स्वार्थ से की गई मदद इंसान को मानव धर्म शिखता है जो हम सब को करना चाहिए ओर आज आपने सारे गांव के लोगो की जमीन वापस लोटा कर ओर कर्ज माफ कर आपने भी निस्वार्थ से आपने ये कदम आपने उठाए और आपने ये कदम लिया ये सब आपने जो भी किया निस्वार्थ किया जो आपको हमारी मदद द्वारा प्ररेणा मिली और हाथ जोड़कर अभी वादन कर साहूकार अपने घर चले गए
राजु ओर संजू गांव ही रुख गये और राजु उपनी ऑटो मोबाइल की नोकरी छोड़ उसने खती करने का निर्णय लिया और संजू ने कलक्टर था उसने अपना तबदला अपने जिले में करवा दिया देखते ही देखते रतुनपुर गांव आज वो सारी सुविधाएं मिलती है जो शहर मै होती है और दूसरी तरफ साहूकार भांनसिह ओर कलेक्टर संजू के साथ मिलकर अपने गांव की तरक्की में साथ दे रहे है
मदद सिर्फ ओर सिर्फ बिना स्वार्थ ओर जात पात देखकर नहीं करनी चाहिए
बस छोटी सी प्रस्तावना आपके समक्ष रख रहा हूं आपको जरूर पसंद आयेगी
सामान्य परिवार से आने वाला राजू ओर संजू जो एक छोटे गाव में रहेता था उस गांव का नाम रतनपुर उत्तर प्रदेश में आता था जो महेज दो हज़ार आबादी वाला गांव था उस गांव में एक साहूकार था जो अपने गांव के लोगो को अपनी धाक से अपना रुदबा दबदबा था वो सबको डरता धमकाता रहेता
राजू ओर संजू अपने पिताजी के कर्ज के दबे हुवे थे
उसके पिताजी चार साल पहले ही चल बसे राजू के घर में उसकी मा और छोटा भाई। संजू दोनों ही अपनी मा के लिए जो बंन पड़े वो करते थे पिताजी हैं चल बसे तब ये दोनों बेटों पर कर्ज का बोझ लाद गए आखिर पिताजी करते भी तो क्या राजू और संजू पढ़या लिख्या और काबिल बनाया जब पिताजी चल बसे तो तब दोनों भाई उतर पदेश में वाराणसी शहर में पढ़ाई कर वहीं नोकरी कर रहे थे दोनों भाई महेंनती थे एक भाई राजू ऑटो मोबाइल की कपनी में एकाउंट का काम करता था और छोटा संजू वाराणसी में ही कलेक्टर था ये दोनों ने रात दिन एक कर पढ़ाई की अपने को पिताजी का जो सपना था वो पूरा किया समय निकाल कर वो अक्सर अपने माता को मिलने रतनपुर जरूर जाते वो भी दोनों भाई एक साथ जब भी गांव जाते अपने माता के लिए कुछ ना कुछ जरूर ले जाते और उनको दुनिया कि सारी खुशियां देते उन्हें अपने गांव से अपने साथ शहर लेके आए उन्होंने अपने माता को नामी शहर मथुरा गोकुल बरसाना वृन्दावन दिल्ली लाल किला आग्रा का ताजमहल सबकुछ दोनों बेटों ने दिखाया जो उन्हे देखने का जो सपना था वो इन दोनों बेटों ने पूरा किया अच्छा खाना अच्छी होटलों में रहे सब कुछ किया और अपने वाराणसी में गंगा स्नान करवाया मानो सारा सुख दोनों बेटों ने बिना बोले इनकी जोली में खुशियों से भर दी कुछ दिनों तक दोनों बेटो के साथ दिन गुजार ने बाद उन्होंने अपने गांव लौट जाने की बात की तब दोनों बेटों ने मा से वहा ना जाने की बात की पर पिताजी ने लिए कर्ज की याद दिलाई ओर कहा अगले हफ्ते फसल की कटाई है जो फसल कटाई करनी होगी जो भी पैसा आएगा कुछ अपने पास रखकर लिए कर्ज का भुगतान करना होगा और हमारी जो जमीन है जो साहूकार के पास गिरवी है उस कर्ज जों लिया था वो तुम्हारी पढ़ाई लिखाई मै मने लगा दिए बस वो जमीन छुड़ानी है तब राजू ने कहा कितना कर्ज लिया था हमने मा ने कहा वो कर्ज का सुत पकड़कर 14 लाख, जों अब करीब 12लाख देने बाकी है ये सुनकर दोनों भाई सुन हो गए और बोले जो खेत में फसल होती है वो करीब कितने की होती है मा ने कहा फसल होती जरूर है पर हमने उचित मोल नहीं मिलता और फसल 75 हज़ार की हो तो सिर्फ हमारे हाथ सिर्फ 15 हज़ार थमा देते है ओरु उसमे से सुत काटकर 7से 8 हज़ार देकर बोलते है जल्द से जल्द हमारे पैसे चुका दो नहीं तो जमीन से भी हाथ धो बैठोगै ये सुनकर दोनों भाई का खून खोल ने लगा इतनी अच्छी फसल होती है सुत और कर्ज पकड़ कर इतना भी नहीं होता और सुत का सुत भी जोड़ ले और कर्ज पकड़ लो फिर भी हमने जमीन कब की छूट जाती पर इस साहूकार ने सिर्फ और सिर्फ अपनी तिजोरी ही भरी मा आप चिंता ना करो जमीन हम छुड़ाकर रहेंगे पिताजी ने लिया हुआ कर्ज हम जरूर चुकाएंगे ये आश्वाशन देकर मा को सो जाने को कहा रात बहुत हो गई है कल आपको गांव छोड़ने जाना है पूरी रात राजू और संजू को नींद नहीं आई हमारी पढ़ाई लिखाई और हमारे सपने पूरा करने रात दिन एक कर दिए और हमे इस मुकाम तक लाने में अपने सपने दाव पर लगा दिए और हम कुछ नहीं कर पाए राजू और संजू इसी सोच मै रातभर सो नहीं पाए और अगले दिन मा को लेकर गांव रतनपुर चल दिए वहा पोहचते ही दोनों भाई ने अपने फसल की कटाई तक रुकने का मन बना लिया था और अपने कामकाज से ओर अतिरिकत छुट्टी के ले ली और गांव में रुक ने का फैसला लिया तीन दिन बाद फसल की कटाई कर उसे साहूकार के पास लेकर नहीं गए और उन्होंने गांव वालो के साथ अपनी फसल सरकारी मंडी में बेच कर सवा लाख रुपए जुटाए लिए और गांव वालो को भी फायदा हुआ साहूकार तिलबिला उठा वो बोला अगर आपने आगे से सरकारी मंडी मै अनाज बेचा तोअच्छा नहीं होगा उसका परिणाम गलत होगा तब संजू ने कहा हम बताया जाए हमारे पिताजी अबतक कितना कर्ज लिया और सुत के साथ कितना चुकाया उसका लेखा जोखा बताए तब साहूकार में अपने मुनीम से कहा इनका बई खाते में कितना लेने निकलता है तब मुनीम ने कहा सुत का सुत पकड़ कर 12 लाख समय मुड़ी ना चुकाने पर उसका दंड पकड़ कर अब 15,लाख देना होगा संजू भड़क उठा और बोला अब तक जितनी भी फसल कटी और सरकारी आंकड़े हिसाब से हमने आपको 60 हज़ार के हिस्सा और 7 हज़ार सुत जो लिया उसे जोड़ कर अबतक हमारे हिसाब से 10 लाख 5 हज़ार हम चुका चुके हैअभी के 95 हज़ार लो अब से जोभी बाकी है हम अगली फसल मै आपको चुका देगे अब हमारा कर्ज महज़ 4लाख रहे गए है वो भी हम जल्द चुका देगे साहूकार को चेतावनी देते हुवे कहा अगर आगे से गांव के किसीभी वसूली की या परेशान किया तो कलेक्टर साब को बोल देगे आप गांववालो को अपने तानासाही मै अत्याचार कर रहे हो इतना बोल चल दिया मा को आश्वाशन देकर कहा चिंता ना करे अब हमारी जमीन जल्द हमारे पास होगी बाकी रकम बैंक में जमा करवा कर वो अपने घर आए खाना खाकर मा बोली बेटा आज तुमने जो किया है वो गांव वाले और हम कभी भी भूलेगे नहीं मा एक बात बोलूं आप गांव वालो को और साहूकार को मत बताना इस जिले का और इस गांव का नया कलेक्टर कोन है मा बोली कियू मै नहीं चाहता कि उन्हें पता चले बस थोड़े दिन और मै अपना तबादला करवा कुगा ताकि इन जैसे साहूकार को सबक सिखा सकु राजू बोला हा भाई सही बात बताई मा निश्चिंत हो जाओ अब नया सूरज निकलेगा जो गांव वालो को अपने फसल की सही दाम ओर सही खुशियां मिलेगी बस थोड़े दिन और अगले दिन को सुबह अपने माता के चरण स्पर्श कर शहर की ओर चल दिए और वाराणसी पोहुचकर अपने गांव के हालात और अत्याचार का विवरण सरकार के समक्ष रखे सरकार ने संजू को जल्द इस समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया करीब कई महीने गुजर गए और साल गुजर गए पर कुछ कर नहीं पाए इस दौरान एक घटना हुई एक सड़क हादसे में जो व्यक्ति घायल हुआ उसकी कार को एक ट्रक ने हाईवे पर इस कार को ओवरटेक कर ने में एक्सिडेंट हुआ ओर ट्रक वाला भाग गया और इस समय राजू उसी हाईवे से गुजर रहा था कोई उसे हस्पताल नहीं लेकर जा रहे थे बड़ी गम्भीर रुप घायाल हुआ था एक क्षण भी सोचे बिना अपनी बाइक को साइड पर खड़ी कर उस घायल आदमी को ऑटो में बिठाकर पास के हस्पताल मै भर्ती करवाया और पुलिस को जान कार दी और थोड़ी देर में डॉक्टर ने कहा उनकी हालत बेहत गम्भीर है उनको खून की शकत आवश्यकता है o ग्रुप खून का प्रबंध ना हुआ तो बचने की गुंजाइश कम है डॉक्टर ने o ग्रुप खून चाहिए पर हस्पताल मै उपलब्ध नहीं है और ब्लड बैंक मै भी नहीं राजू चिंता मै पड़ गया ओर उसे याद आया कि पिछली बार सरकारी रक्त दान का शिबिर था तब भाई के खून की जांच हुई तब o ग्रुप ही था बही से फोन लगाया और कहा एक घायल आदमी है जो मै हस्पताल लाया हूं उन्हें o ग्रुप का खून की जरूरत है भाई आपका खुंन ग्रुप भी o ही है आप जल्द हस्पताल आ जाओ भाई करीब 15 मिनट में पोहच गए और अपना खून उस आदमी को दिया करीब दो बोतल की जरूरत पड़ी और वो आदमी बच गया बस अभी वो भान मै नहीं आया था तब तक उस आदमी का जो घायल था उसका नाम सुरजसिंह था वो रतनपुर का ही रहेने वाला था उसके पिताजी भानसिंह साहूकार थे इसका पता चलते ही राजू ने उनके गांव मै फोन कर दिया ओर कहा की आपका बेटा सड़क हादसे मै घायल हुआ था और संजीवनी हस्पताल मै भर्ती है वाराणसी मै अब वो खतरे के बाहर है आप जल्द आ जाए इतना कहकर फोन रखकर राजू और संजू ने सुरजसिह को देख कर वो चले गए और दूसरी तरफ राजू ने दी हुई जानकारी के अनुसार ट्रक के चालक को पुलिस ने उसे पकड़ लिया और दूसरे दिन पुलिस ने ट्रक की पहेचान के लिए राजू को बुलाया और राजू ने उस ट्रक को देख ओर गाड़ी नंबर को पहेचान लिया और कहा ये ही ट्रक था और दूसरी तरफ अस्पताल मै सुरजसिह ने उस व्यक्ति को मिलने की जिद की फिर ही वो हस्पताल से घर जाएगा हस्पताल से डॉक्टर ने फोन लगाया कहा राजू जी सुरजसिह ने आप दोनों को हस्पताल बुलाया है और कहा सुरजसिह की अब तबीयत ठीक है और वो स्वस्थ है और वो लोग आपका अभिवादन करना चाहते है राजू ने कहा हमे नहीं मिलना बोल दो वों लोग इन्कार कर रहे है और उनसे कहो हमने अपना फ़र्ज़ निभाया है और हम ये सब करके हमे कोई बड़ा काम नहीं किया हमने मानव धर्म निभाया है बस हम नहीं मिलसकते इस तरफ से डॉक्टर से फोन लेकर भानसिह ने कहा बस हम आपको मिलना चाहते है और मेरा बेटा बोल रहा है कि आप लोग मिलने नहीं आओगे तबतक मै यहां से घर नहीं जाउगा ये सुनकर राजू ओर संजू ना बोल नहीं पाए और कल मिल ने आयेगे ऐसा आश्वाशन देकर उनकी बात मान ली और फोन रख दिया दोनों भाई ना चाहते हुए भी उन्हे मिलना पड़ेगा क्योंकि उनके गांव के ही साहूकार के बेटे की जान बचाई थी पर जब जान बचाते समय हमे पता ही नहीं था ये कोन है जब पता चला वो हमारे गांव की था तब वो लोग तो हमारा एहसान समझेंगे और येही तो हम नहीं चाहते की वो लोग हमसे मिले पर ईश्वर को ये ही मनजुर होगा ये समझ कर दूसरे दिन मिलने चले गए सुरजसिह को सुबह ही मिलने पहोच गए और सुरजसिह को डॉक्टर ने बताया राजू ने तुम्हे सड़क हादसे से आपको हस्पताल लाए जब आप जीवन मुत्यु के बीच आप जुल रहे थे तब आपको खून काफी बहे गया था तब इन्हीं के भाई संजू ने आपको खून दिया जो बड़ी मुश्किल से मिलता है वो o ग्रुप है जों सही समय पर आपकी जान बच गई ये सुनकर सुरजसिह ने इन दोनों भाई को आभार व्यकत किया और उन्हं देवता मान उनके पैर पड़े ओर दोनों भाइयों ने ये मान देखकर खुशी से आंख भर आई और उस समय उनके पिताजी भानसीह ने ये दोनों भाईयो को देखकर ओर सभी बात सुनकर भाव विभोर हो गए और इन दोनों भाई वहा से जा ही रहे थे साहूकार ने तब दोनों भाईयो को रोकलिया कहा आज मेरे गांव के दो वीरो ने मेरे बेटे की जान बचा कर मेरे बेटे को नया जीवनदान दिया है ये बात मै कभी नहीं भूलूंगा ये बोल कर आभार व्यकत किया और दोनों भाई ने इजाजत लेकर वहा से निकल गए ओर वो अपने अपने काम पर चले गए और भानसिह सुरजसिह ओर उनकी माता के साथ वो अपने गांव रतनपुर पोहच गए और साहूकार भांनसिह ने राजू के पिताजी की जमीन के दस्तावेज और उनका बच्चा हुआ कर्ज माफ कर दिया और पूरे गांव मै ये कहेलवाया हमारे पास जीनलोगो की जमीन गिरवी है ओर कर्ज लिया है वो सब माफ कर दिया है राजू के पिताजी के दस्तावेज के पेपर राजू की मा को सौंप दिए ओर कहा आज से आपके ऊपर कोई कर्ज नहीं है ये सुनकर राजू की मा भाव विभोर हुई कहा क्यों की इतनी महेरबानी तब साहूकार ने कहा मेरे पुत्र को नया जीवन दान दिया है आपके दोनों बेटों ने जब जीवन मुत्यू के बीच जुल रहा था तब आपके बेटो ने मेरे बेटे को जानते भी नहीं थे अनजान मे की गई मदद आज मुझे परित कर रही है की हर कोई मदद स्वार्थ से नहीं होती है अब तो मै आपका ऋणी हूं ये सुनकर राजू की मा हाथ जोड़ धन्यवाद कहा साहूकार ने कहा मुझे हाथ जोड़ने चाहिए पर उसी दिन राजू ओर संजू गांव आए ओर साहूकार के हाथ में 4लाख हाथ मै थमा कर कहा हमने कोई एहसान नहीं किया है सिर्फ हमने मानव धर्म निभाया है ओर कहा साहूकार जी हमने आप से कहे अनुसार आपका पूरा बाकायदा जो कर्ज था जो हमने आपको सारे चुका दिया है इस बीच हमने अपने पिताजी को खोया है ओर आज हमने अपने पिताजी की इच्छा को पूर्ण कर हमने पिताजी को कर्ज से मुक्त कर उनके दिल से भार हमेशा के लिए दूर कर दिया है जो आज तक चैन की नींद सो नहीं पाए आज उनके आत्मा को शांति मिलेगी साहूकार ने कहा ये पैसे तुम वापस ले लो आप दोनों भाई ने मेरे बेटे की जान बचाई भले अनजाने मै बचाई पर में ये पैसे ले नहीं सकता राजू बेटा ये पैसे रखलो राजू ने कहा ये पैसे आपके है जो हमारे पिताजी ने कर्ज के रूप में लिए थे वो आज पूरा हो गया ये आपको रखने ही होगे अगर हमने कोई मदद की है वो सिर्फ ओर सिर्फ निस्वार्थ भाव से बिना आशा से हमने की थी और उसमें कोई स्वार्थ होता तो आज हम ये पैसे लौटा ते नहीं आपसे सौदा करते पर हमने जो भी किया जो स्वार्थ के खातिर नहीं किया आज जो भी हुआ ओर हमने किया वो सब अपने अपने कर्म ही थे जो एक दूसरे के काम आए मदद कोई किसी की मोताज नहीं बिना स्वार्थ से की गई मदद इंसान को मानव धर्म शिखता है जो हम सब को करना चाहिए ओर आज आपने सारे गांव के लोगो की जमीन वापस लोटा कर ओर कर्ज माफ कर आपने भी निस्वार्थ से आपने ये कदम आपने उठाए और आपने ये कदम लिया ये सब आपने जो भी किया निस्वार्थ किया जो आपको हमारी मदद द्वारा प्ररेणा मिली और हाथ जोड़कर अभी वादन कर साहूकार अपने घर चले गए
राजु ओर संजू गांव ही रुख गये और राजु उपनी ऑटो मोबाइल की नोकरी छोड़ उसने खती करने का निर्णय लिया और संजू ने कलक्टर था उसने अपना तबदला अपने जिले में करवा दिया देखते ही देखते रतुनपुर गांव आज वो सारी सुविधाएं मिलती है जो शहर मै होती है और दूसरी तरफ साहूकार भांनसिह ओर कलेक्टर संजू के साथ मिलकर अपने गांव की तरक्की में साथ दे रहे है
मदद सिर्फ ओर सिर्फ बिना स्वार्थ ओर जात पात देखकर नहीं करनी चाहिए
लेखक
- धीरेन्द्र महेता

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