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Sunday, August 1, 2021

बालक की ईमानदारी ने कुछ हमे शिखाया

                 बालक की ईमानदारी 

एक छोटे से गाँव में नंदू नाम का एक बालक अपने निर्धन माता-पिता के साथ रहता था। एक दिन दो भाई अपनी फसल शहर में बेचकर ट्रैकटर से अपने गाँव रहे थे। फसल बेचकर जो पैसा मिला वह उन्होंने एक थैले में रख लिया था। अचानक एक गड्ढा गया और ट्रकटर उछला और थैली निचे गिर गई जिसे दोनों भाई देख नहीं पाए और सीधे चले गए।

 

बालक नंदू खेलकूद कर रात को अँधेरे में अपने घर जा रहा था। अचानक उसका पैर किसी वस्तु से टकरा गया। उसने देखा तो पता चला कि किसी की थैली है। जब नंदू ने थैली खोलकर देखा तो उसमे नोट भरे हुए थे। वह हैरान हो गया  और सोचने लगा कि पता नहीं किसकी थैली होगी। उसने सोचा कि अगर वह थैली यही छोड़ गया तो कोई और इसे उठा ले जाएगा। वह मन ही मन सोचने लगा कि जिसकी यह थैली है उसे कितना दुख और कष्ट हो रहा होगा।

 

हालाँकि लड़का उम्र से छोटा था और निर्धन माँ-बाप का था लेकिन उसमें सूझबूझ काफी अच्छी थी। वह थैली को उठाकर अपने घर ले आया। उसने थैली को झोपडी में छुपाकर रख दिया फिर वापस आकर उसी रास्ते पर खड़ा हो गया। उसने सोचा कि कोई रोता हुआ आएगा तो पहचान बताने पर उसे थैली दे दूंगा।

 

इधर थोड़ी देर बाद दोनों भाई घर पहुँचे तो ट्रकटर में थैली नहीं थी। दोनों भाई यह जान निराश होते हुए बहुत दुखी होने लगे। पुरे साल की कमाई थैली में भरी थी। किसी को मिला भी होगा तो बताएगा भी नहीं। शायद अभी वह किसी के हाथ लगा हो यह सोच दोनों भाई टोर्च लेकर उसी रास्ते पर चले जा रहे थे।

 

छोटा बालक नंदू उन्हें रास्ते में मिला। उसने उन दोनों से कुछ भी नहीं पूछा लेकिन उसे शंका हुई कि शायद यह थैली इन्ही की ही हो। उसने उनसे पूछा, ‘आप लोग क्या ढूंढ रहे है?” उन्होंने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसने दोबारा पूछा, “आप दोनों क्या ढूंढ रहे हो?” उन्होंने कहा, “अरे कुछ भी ढूंढ रहे है तू जा तुझे क्या मतलब।

 

दोनों आगे बढ़ते जा रहे थे। नंदू उनके पीछे चलने लगा। वह समझ गया था कि नोटों वाली थैली संभवता इन्हीं की ही है। उसने तीसरी बार फिर पूछा तो चिल्लाकर एक भाई ने कहा, “अरे चुप हो जा और हमें अपना काम करने दे। दिमाग को और ख़राब कर।अब नंदू को समझ गया की वह थैली अवश्य इन्हीं की ही है। उसने फिर पूछा, ‘”आपकी थैली खो गई है क्या?”

 

दोनों भाई एकदम रुक गए और बोले, “हाँ।नंदू बोला, “पहले थैली की पहचान बताइए। जब उन्होंने पहचान बताई तो बालक उन्हें अपने घर ले गया। टोकरी में रखी थैली उन दोनों भाइयों को सौंप दी। दोनों भाइयों की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था। नंदू की ईमानदारी पर दोनों बड़े हैरान थे। उन्होंने इनाम के तौर पर कुछ रूपए देने चाहे पर नंदू ने मना कर दिया और बोला, “यह तो मेरा कर्तव्य था।

 

दूसरे दिन दोनों भाई नंदू के स्कूल पहुँच गए। उन्होंने बालक के अध्यापक को यह पूरी घटना सुनाते हुए कहाहम सब विद्यार्थियों के सामने उस बालक को धन्यवाद देने आए हैं। अध्यापक के नेत्र से आँसू गिरने लगे। उन्होंने बालक की पीठ थपथपाई और पूछा, “बेटा, पैसे से भरे थैले के बारे में अपने माता-पिता को क्यों नहीं बताया।नंदू बोला, “गुरूजी, मेरे माता-पिता निर्धन हैं। रुपयों को देखकर उनका मन बदल जाता तो हो सकता है रुपयों को देखकर उसे लौटाने नहीं देते और यह दोनों भाई बहुत निराश हो जाते। यह सोच मैंने उन्हें नहीं बताया।

 सभी ने नंदू की बड़ी प्रशंसा की। दोनों भाइयों ने उसे कहा, “बेटा धन्यवाद। गरीब होकर भी तुमने ईमानदारी को नहीं छोड़ा।

 


    लेखक 

धीरेन्द्र महेता

 

Wednesday, June 2, 2021

आज की पीढ़ी

 

आज की पीढ़ी


पिछले एक साल से कोरोना काल में लोगों का हाल देख कर याद आता है जब हम हमेशा के लिए छात्र थे.


'आरक्षण आंदोलन' से बहुत कुछ सहने के बाद, मुझे 'आरक्षण' शब्द से चिढ़ होने लगी जो अभी भी बरकरार है। इसलिए मैं हमेशा के लिए एक युवक हूं। अगर कोई मुझे सिर्फ इस कारण से विशेष सुविधा देता है, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा।

खैर, यह एक क्रिया विशेषण है, मुख्य रूप से हमने जीवन के उस खूबसूरत समय को बिना कुछ ऐसे संकटों के हंसते-खेलते बिताया और हम नहीं जानते कि जीवन के चार दशक कहां चले गए और आज ...


आज हमारे बच्चे जीवन की कटुता को देखकर और सहते हुए दो दशक में जी रहे हैं। जन्म से भूकंप, फिर सुनामी... कई नई जानलेवा बीमारियां जैसे डेंगू, कोरोना, क्वारंटाइन, अकेलापन, एहतियात, कई करीबी लोगों की अचानक मौत, दर्द... उफ़. . ये लोग भयानक तनाव के बीच बड़े हो रहे हैं। मुझे याद है कि मैंने बुखार के सिवा किसी बीमारी का नाम तक नहीं सुना था जो सिर्फ मलेरिया है और उन 3 दिनों में मैंने फैमिली डॉक्टर की दो गुलाबी गोलियां खा लीं। किसी विषय पर  बात करते समय। चाय की चुस्की के साथ  हम नाश्ते में ब्रेड बटर या खारी टोस्ट  खाते हैं और आज की पीढ़ी को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है.


लेकिन एक पीढ़ी को इतने मानसिक और शारीरिक दबाव में बढ़ते हुए देखना अफ़सोस की बात है। यह स्मार्ट पीढ़ी सब कुछ तेजी से चाहती है, इसे पाने के लिए जो कुछ भी करना पड़ता है, वह करने के लिए तैयार है, लेकिन यह प्रकृति हर दिन नई बाधाओं को बनाने में अधिक से अधिक कुशल होती जा रही है।

हालांकि नई पीढ़ी बहुत ही समझदारी से इस संकट से बाहर निकल रही है, लेकिन इतना नाजुक युग ऐसे अनुभवों के लिए थोड़ा सा है भगवान!

अभी इन बच्चों को अपने पंखों में पूरी हवा लेकर आसमान में उड़ना है, पानी में डुबकी लगानी है, बिंदासप में घूमना है, इंद्रधनुष के सपने देखना है, उन्हें पूरा करने के लिए डरना भी पड़ता है. पर इन्हे हालातो से लड़ने की ताकत देना आज की पीढी सब कुछ हाथ में चाहती है  पर संघर्ष का अनुभव 10पतिसत ही आज की पीढी में रह गई है सब सुविधा आसानी से चाहीए 


अंतिम में इतना ही कहूं गा तो आज की पीढी को हर आपदा से लड़ने की ताकत देने था सबर करने की ताकत देना  अभी तो इन्होंने ने जिंदगी के पहले पायदान पर कदम रखा है धीरे धीरे आगे बड़ना है 

ईश्वर आजकी पीढी को हर कदम पर साथ दे  ये ही ईश्वर से प्रार्थना है ।

लेखक

धीरेन्द्र महेता

Friday, May 28, 2021

जिंदगी के बहुत सी समस्या हल हो जाएगी जब अपना रास्ता खुद बनाओगे




जिंदगी के बहुत  सी समस्या हल हो जाएगी  जब अपना रास्ता खुद   बनाओगे

Monday, May 17, 2021

हार गया लेकिन खुद से जीत गया- Motivational story


      हार गया लेकिन खुद से जीत गया



दोस्तों नमस्कार आप सभी का स्वागत है आज मैं आपको एक ऐसी Motivational Stories बता रहा हु जिसे पढ़ने के बाद  आपकी ऊर्जा पहले जैसी नही रहेगी तो चलिए
बिना आपका समय गवाये motivational story को शुरू करते है
 
हरीश नाम का एक लड़का था उसको दौड़ने का बहुत शौक था 
वह कई मैराथन में हिस्सा ले चुका था परंतु वह किसी भी RACE  को पूरा नही करता था
एक दिन उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वह RACE पूरी जरूर करेगा
अब रेस शुरू हुई 

हरीश ने भी दौड़ना शुरू किया धीरे 2 सारे धावक आगे निकल रहे थे
मगर अब हरीश थक गया था वह रुक गया फिर उसने खुद से बोला अगर मैं दौड़ नही सकता तो  कम से कम चल तो सकता हु उसने ऐसा ही किया वह धीरे 2
चलने लगा मगर वह आगे जरूर बढ़ रहा था  अब वह बहुत ज्यादा थक  गया था
और नीचे गिर पड़ा  उसने खुद को बोला  की वह कैसे भी करके आज दौड़ को पूरी जरूर करेगा  वह जिद करके वापस उठा  लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा और अंततः वह रेस पूरी कर गया माना कि वह रेस हार चुका था लेकिन आज उसका विश्वास चरम पर था क्योंकि आज से पहले RACE  को कभी पूरा ही नही कर पाया था वह जमीन पर पड़ा हुआ थाक्योंकि उसके पैरों की मांसपेशियों में बहुत खिंचाव हो चुका था लेकिन आज वह बहुत खुश था क्योंकि आज वह हार कर भी जीता था

motivational story in hindi for success
दोस्तों हम भी तो इस तरह की गलती करते है हमारी life में
कभी भी अगर कोई परेशानी होती है तो उस काम को नही करते और छोड़ देते है
अगर आप एक Student हो और रोज 10 hr की STUDY करते हो
और किसी दिन कोई परेशानी की वजह से आप पढ़ाई नही करते मगर आपको
भले ही 5 hr मिले पढ़ना जरूर चाहिए हरीश की कहानी से हमे यही सीखने को मिलता है कि अगर हम  लगातार आगे बढ़ते रहे तो एक दिन हम हारकर भी जीत
जाएंगे

छोटे छोटे कदम बढ़ाते जाओ और आगे बढ़ते जाओ यही सफलता का नियम है


पेशकश
धीरेन्द्र महेता

Saturday, March 13, 2021

व्यक्तिगत ब्रांडिंग बेहद जरूरी है।



जिस क्षेत्र में आप अपना करियर बना रहे हैं,  उस क्षेत्र में तरक्की के लिए अपनी एक विशेष पहचान बनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए व्यक्तिगत ब्रांडिंग बेहद जरूरी है।
 


लक्ष्य निर्धारित करें

अपनी ब्रांडिंग करने के लिए सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि आप किस वर्ग समूह के बीच पहचान बनाना चाहते हैं। इसके बाद पहचान बनाने से जुड़े लक्ष्य निर्धारित कर लें। इससे आपके काम की दिशा तय हो जाएगी और आप चरणबद्ध तरीके से अपनी ब्रांडिंग करने में कामयाब होंगे। मसलन,  अगर आप एक पत्रकार हैं,  लेकिन अपनी ब्रांडिंग एक लेखक के तौर पर करना चाहते हैं तो आपको साहित्य जगत के लोगों से जुड़ने, साहित्यिक गोष्ठियों में हिस्सा लेने और लिटरेरी ब्लॉग्स पर अपने विचार प्रकट करने की जरूरत होगी।


अपनी पहचान बनाने की योजना बनाएं

अलग-अलग पेशों में वर्ग-समूह का व्यवहार अलग-अलग होता है,  इसलिए आप अपने पेशे के अनुसार वर्ग विशेष के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए सिलसिलेवार तरीके से उसके बीच खुद को स्थापित करने की योजना बनाएं।


शख्सियत बनाएं प्रभावशाली

एक ब्रांड के तौर पर अपनी पहचान स्थापित करने में आपकी शख्सियत बहुत मायने रखती है। आपका व्यवहार और पहनावा देख कर लोग आपके बारे में धारणाएं विकसित करते हैं। अगर आप खुशमिजाज हैं और आपकी ड्रेसिंग भी स्मार्ट दिखाई देती है तो इससे वर्ग विशेष के बीच आपकी छवि अच्छी बनती है। ऐसे में अपने पेशे के अनुरूप अपनी ड्रेसिंग पर खास ध्यान दें और अपनी भाव-भंगिमा भी ऐसी रखें कि लोग आपसे जुड़ने और आपके साथ काम करने के लिए आकर्षित हों


ऊंचे हों आदर्श


आप चाहे जिस भी पेशे से ताल्लुक रखते हों,  आपके उच्च आदर्श और नैतिक मूल्यों से आपकी साख मजबूत होती है। इससे आपकी विश्वसनीयता बढ़ती है और आप लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब होते हैं। व्यक्तिगत ब्रांडिंग के दौरान व्यवहार में विनम्रता बनाए रखें और सहयोगी रवैया अपनाएं। खुद को हुनरमंद,  ऊर्जावान और रेस्पॉन्सिव दिखाने से भी आपकी इमेज बेहतर हो जाती है।

Sunday, January 31, 2021

बिना लक्ष्य से कहीं नहीं पाउच सकते जीवन मै अपना लक्षय जरूर बानाए


बिना लक्ष्य से कहीं नहीं पाउच सकते जीवन मै अपना लक्षय जरूर  बानाए 

Friday, January 22, 2021

कुछ बड़ा करने के लिए कुछ बाते ध्यान मै रखनी पड़ती है तब आप अपने मुकाम तक पाउच पाते हैं इसलिए ये वीडियो जरूर एकबार देखे


कुछ बड़ा  करने के लिए कुछ बाते ध्यान मै रखनी  पड़ती है तब आप अपने मुकाम तक पाउच पाते हैं इसलिए ये वीडियो जरूर एकबार देखे 

Wednesday, January 13, 2021

जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना हो तो एक बार जरूर सुने


जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना हो तो अपने मन की बात ना छुपाए  उसे उजागर करे  


 

Tuesday, January 12, 2021

आंदोलन भाग १ विषय किसान का आंदोलन


किसान कर रहे है आंदोलन करना उनका अधिकार हे ये जरूरी भी है क्योंकि उन्हें खेत से उठाकर सभी किसानभाई  ओ को  सड़कों पर बिठा  दिया गया है किसान विरोधी कानून बताकर इनहे गुमराह किया जा रहा है अगर ये किसान के हक़ वाला कानून ना होता थो आज सभी राज्य में ये आंदोलन हुवे होते और उनके सपोर्ट में 130 करोड़ की आबादी वाला भारत देश किसान के साथ खड़े होते  और ये कानून कोईभी  सरकार ले आती तब भी हम किसान के साथ होते पर ये कानून किसान विरोधी थोड़ी है अगर होता तो सिर्फ तीन राज्य में ये आंदोलन कर रहे है  किसान की तरह बाकी के राज्य के किसान क्यों नहीं है बाकी के लोग समजदार है कानून को जानते है  और समजते है पर कई किसान  इस कानून के विरोध में जंग छेड़ दी है उन्हे भी पता है फिर  भी इस आंदोलन में शामिल है  पर एक बार तो किसानभाई ओ को सोचना चाईये था इनके  इस कदम से कई  लोग सदमे मै है एक बार भी कभी उन्होंने सोचा नहीं  है और सोचा होगा अगर सोचा होता किसान भाईयो ने ये कदम नहीं उठा थे  ऑर्र नाही किशिभी व्यक्ति के बहेकावे में नहीं आते पर आज कई साहूकार के यूनियन के बाहेकावे में आकर वो आज सड़कों पर है और आंदोलन कर रहे है


 पर आज किसान भाइयों को मे बता ना चाहता हु जो किसान खुद भुखे रहे जाते थे वो ना समझ होकर आज सड़कों पर है कभी भी ऐसा पल याद नहीं आता कि अनाज की किलत हुई हो और किसान मोज करता नजर आया हो पर आज सभी को ये दिन देखने पड रहे है ऐसा कोई वायक्या याद नहीं कभी किसान के कारण  भुखे  सोना पड़ा हो  किसान का रूप देवता के बाद उनका नाम आता है जो अन्नपूर्णा कहा गया है  किसान ने जमी से सिचा हुआ अनाज हर वर्ग के लोगों तक पहुंचाया ये सोचने वाला किसान आज वो सडको  पर है और हम काम पर कभी हमने उन लोगों तक  हमने नए कानून है जो सरकार लाई है उसकी हर जानकारी उन लोगों तक हमने  पहुंचाई नहीं है जो भी पहुंची हुई कुछ जानकारी गलत दी गई क्योंकि कुछ लोग किसान को अमीर स्वानलाबी बनते नहीं देख सकते क्योंकि उनकी बाज़ार बन्द हो रही है और खुद रास्ते पर आ जाएगे इसी डर से उनको ये कानून जो किसान विरोधी नहीं बल्कि किसान हित कानून है ये पता होने के बावजूद कुछ लोग  इस वजह से  सत्ताधारी ओ को  डर सता रहा  है जी हा इस वज़ह से किसान भाई के  कंधों पर अपनी उमिद का दिया जलाकर  इस कानून को उनका अधिकार छीनने वाला कानून बताकर उनको भड़का रहे है और उन्हे आंदोलन करने को मजबूर करवा कर  गंधी राजनीति कर रहे है और अपनी रोटियां शेक रहे है और उनके साथ खुद भी आंदोलन कर है और नाम दिया जा रहा है किसान का आंदोलन पर असल में साहूकार के लोगों का आंदोलन है खुद  परेशान है और बिचोलिये परेशान है इसलिए वो  आज किसान के नाम पर ये हगामा खड़ा कर आज भारत वर्ष का नाम खराब कर रहे है 

सरकार  समझाते रहे गई ओर ये समजने से रहे और  किसान के नेता बने हुवे यूनियन के नेता कानून वापस लो ये ही कहे रहे है और बस कहते रहेते है हर वकत कानून वापस नहीं तो घर वापसी नहीं 

आज कितने भी दौर कि बाचित हो जाए पर ये सामजने से रहे क्योंकि उनको कानून वापसी चाहिए  ताकि सफल सरकार को नीचा दिखाना चाहते है

आज मने और कई लोगो ने ये कानून के बारे जानकारी ली होगी हम जैसे कानून को समझ गए क्यों आया है कानून फिर भी हम हरोज खबर देखते है पर कभी एक ख़बर को अपने विचार को या इश कानून के बारे में हम ने कुछ लिखा नहीं नाही किसान को को हमारी भूख मिटा था है पर कभी भी हम उनके लिए समझाने नहीं गए या हम अच्छी सची ख़बर उन तक जानकारी नहीं पोहुचाई  

अब उच्च नयायलय भी बीच का हल निकाल ने के लिए कमेटी को गठन किया ताकि सरकार और किसान मै ताल मेल हो पर हम अब भी चुप है  और हम सब देख रहे है 

हम सिर्फ बयान बाजी करते है सिर्फ देखते है और कमेंट करते है पर कभी भी में और आप इस बारे मे खुल के बोलते नहीं है आज मने हिम्मत दिखाई है कुछ अपने विचार रख कर  कुछ विचार लिख कर आगे तक भेजे  जिससे हम सरकार को और किसान को बता सके क्या गलत है और क्या सही 


ये भाग 1 था .... कमक्ष


Friday, November 27, 2020

चाणक्य नीती - किसी भी दुख से बहार कैसे निकले ये जानने के लिए वीडीयो जरूर देखे जिससे आप खुदको बदलने पर उतारू हो जाएगे Motivation video


चाणक्य नीती - किसी भी दुख से बहार कैसे निकले   ये जानने के लिए वीडीयो जरूर देखे  जिससे आप खुदको बदलने  पर उतारू हो जाएगे  Motivation  video


 

राजनीती बदल रही है साथ ही मेरे भारतवासीभी बदल रहे है

राजनीती बदल रही है  साथ ही  मेरे भारतवासीभी  बदल रहे है  मोदी जी  डर गया है अब राहुलजी ने राजनीति सीखली है अच्छी बात है कोई भी अपनी पार्टी क...