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Wednesday, June 2, 2021

आज की पीढ़ी

 

आज की पीढ़ी


पिछले एक साल से कोरोना काल में लोगों का हाल देख कर याद आता है जब हम हमेशा के लिए छात्र थे.


'आरक्षण आंदोलन' से बहुत कुछ सहने के बाद, मुझे 'आरक्षण' शब्द से चिढ़ होने लगी जो अभी भी बरकरार है। इसलिए मैं हमेशा के लिए एक युवक हूं। अगर कोई मुझे सिर्फ इस कारण से विशेष सुविधा देता है, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा।

खैर, यह एक क्रिया विशेषण है, मुख्य रूप से हमने जीवन के उस खूबसूरत समय को बिना कुछ ऐसे संकटों के हंसते-खेलते बिताया और हम नहीं जानते कि जीवन के चार दशक कहां चले गए और आज ...


आज हमारे बच्चे जीवन की कटुता को देखकर और सहते हुए दो दशक में जी रहे हैं। जन्म से भूकंप, फिर सुनामी... कई नई जानलेवा बीमारियां जैसे डेंगू, कोरोना, क्वारंटाइन, अकेलापन, एहतियात, कई करीबी लोगों की अचानक मौत, दर्द... उफ़. . ये लोग भयानक तनाव के बीच बड़े हो रहे हैं। मुझे याद है कि मैंने बुखार के सिवा किसी बीमारी का नाम तक नहीं सुना था जो सिर्फ मलेरिया है और उन 3 दिनों में मैंने फैमिली डॉक्टर की दो गुलाबी गोलियां खा लीं। किसी विषय पर  बात करते समय। चाय की चुस्की के साथ  हम नाश्ते में ब्रेड बटर या खारी टोस्ट  खाते हैं और आज की पीढ़ी को इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं है.


लेकिन एक पीढ़ी को इतने मानसिक और शारीरिक दबाव में बढ़ते हुए देखना अफ़सोस की बात है। यह स्मार्ट पीढ़ी सब कुछ तेजी से चाहती है, इसे पाने के लिए जो कुछ भी करना पड़ता है, वह करने के लिए तैयार है, लेकिन यह प्रकृति हर दिन नई बाधाओं को बनाने में अधिक से अधिक कुशल होती जा रही है।

हालांकि नई पीढ़ी बहुत ही समझदारी से इस संकट से बाहर निकल रही है, लेकिन इतना नाजुक युग ऐसे अनुभवों के लिए थोड़ा सा है भगवान!

अभी इन बच्चों को अपने पंखों में पूरी हवा लेकर आसमान में उड़ना है, पानी में डुबकी लगानी है, बिंदासप में घूमना है, इंद्रधनुष के सपने देखना है, उन्हें पूरा करने के लिए डरना भी पड़ता है. पर इन्हे हालातो से लड़ने की ताकत देना आज की पीढी सब कुछ हाथ में चाहती है  पर संघर्ष का अनुभव 10पतिसत ही आज की पीढी में रह गई है सब सुविधा आसानी से चाहीए 


अंतिम में इतना ही कहूं गा तो आज की पीढी को हर आपदा से लड़ने की ताकत देने था सबर करने की ताकत देना  अभी तो इन्होंने ने जिंदगी के पहले पायदान पर कदम रखा है धीरे धीरे आगे बड़ना है 

ईश्वर आजकी पीढी को हर कदम पर साथ दे  ये ही ईश्वर से प्रार्थना है ।

लेखक

धीरेन्द्र महेता

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